Bhishma Panchak : भीष्म पंचक व्रत क्या है? जानिए महत्व, पूजन विधि और कब होगा समाप्त

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Last Updated: सोमवार, 15 नवंबर 2021 (13:19 IST)
Vrat 2021 सोमवार, 15 नवंबर 2021 से भीष्म पंचक व्रत शुरू हो गया है। हर साल प्रबोधिनी अथवा देवउठनी एकादशी के दिन से भीष्म पंचक व्रत शुरू होता है, जो पांचवें दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है, इसलिए इसे भीष्म पंचक कहा जाता है। भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। इस वर्ष भीष्म पंचक व्रत 15 नवंबर, सोमवार से शुरू होकर शुक्रवार, 19 नवंबर 2021 को समाप्त होगा।

महत्व- पौराणिक मान्यता के अनुसार युधिष्ठिर के कहने पर भीष्म पितामह ने देवोत्थान एकादशी से लेकर पांचवें दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा तक (5 दिनों तक) राजधर्म, वर्णधर्म, मोक्षधर्म आदि पर उपदेश दिया था। इसी स्मृति में भगवान श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर भीष्म पितामह के नाम पर भीष्म पंचक व्रत स्थापित किया था।

इस संबंध में मान्यता है कि कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं या पुरुष बिना आहार के रहकर यह व्रत पूरे विधि-विधान से करते हैं। जो लोग इस व्रत को करते हैं, वे जीवनपर्यंत कई तरह के सुखों को भोग कर मोक्ष को प्राप्त करते हैं। इस व्रत को करने वालों को धन-धान्य, पुत्र-पौत्र आदि सभी की प्राप्ति होकर वे सभी प्रकार के भौतिक सुखों को प्राप्त करेंगे।

Bhishma Panchak Puja Vidhi भीष्म पंचक व्रत पर कैसे करें पूजन, पढ़ें विधि-

- इस दिन दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके या शुद्ध होकर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के निमित्त व्रत का संकल्प करें।


- पूजन वाले स्थान पर गोबर से लीप लें और उस पर सर्वतोभद्र की वेदी बनाकर कलश स्थापित करें।
- भगवान श्री कृष्ण का पूजन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करते हुए करें।

- 'ॐ विष्णवे नमः' मंत्र बोलकर स्वाहा मंत्र से घी, तिल और जौ की 108 आहुतियां देकर हवन करें।

- पूजन के समय एक बड़ा दीया लेकर शुद्ध देसी घी से जलाएं।

- इस बात का ध्यान रखें कि इस व्रत में दीपक पांच दिनों तक लगातार जलता रहना चाहिए।



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