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नास्त्रेदमस से भी बड़े भविष्यवक्ता हैं भारत के अच्युतानंद दास, लिखी हैं 1 लाख से ज्यादा किताबें

Updated: शनिवार, 18 अप्रैल 2026 (19:00 IST)
Achyutananda das malika predictions : भारत में यूं तो कई भविष्यवक्ता हुए हैं लेकिन 16वीं सदी में ओड़िसा राज्य में जन्में अच्युदानंद दास की भविष्यवाणियों को खासी चर्चा होती है। दावा किया जा रहा है कि उनकी अब तक की भविष्यवाणियां सच हुई हैं। फ्रांस के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस भी 16वीं सदी में (14 दिसंबर 1503) जन्में थे। अच्युतानंद दास को भारत का नास्त्रेदमस माना जा रहा है। आओ जानते हैं कि कौन हैं स्वामी अच्युतानंद दास।
 
 
कौन है अच्युतानंद ( Who is Achyutananda das ) : कहा जाता है कि अच्युतानंद दास जी भगवान जगन्नाथ के परमभक्त, कवि, दृष्टा और वैष्णव संत थे। उनके काल को विद्वानों द्वारा 1480 और 1505 के बीच कहीं माना है। उनकी माता का नाम पद्मावती और पिता का नाम दीनबंधु खुंटिया था। उनके दादा गोपीनाथ मोहंती जगन्नाथ मंदिर में एक मुंशी थे। अच्युतानंद का जन्म उड़ीसा के कटक जिले के तिलकाना नाम के एक गांव में हुआ था। कहते हैं कि अच्युतानंद महाराज जन्म से गोपाल यादव थे।
 
 
पंचसखा में से एक (panchasakha achyutananda das): ओड़ीसा में प्रसिद्ध पांच संत हुए हैं जो आपस में मित्र थे। उन्हें ही ओड़ीसा में पंचसखा कहा जाता है। उड़ीसा वह आध्यात्मिकता और साहित्य पंचसखा (अच्युतानंद दास, अनंत दास, जसवंत दास, जगन्नाथ दास और बलराम दास) के प्रसिद्ध पांच मित्रों में से एक थे, जिन्होंने ओडिशा के लोगों के लिए प्राचीन हिंदू संस्कृत ग्रंथों आयुर्वेद, योग, तंत्र, अनुष्ठान, कथा आदि को उड़िया भाषा में ट्रांसलेट किया था। कहा जा रहा है कि संत अच्युतानंद चैतन्य महाप्रभु के भी मित्र थे। 
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भविष्य मालिका ( Bhavishya malika Book) : संत अच्युतानंददास जी ने कई विषयों पर किताबें लिखी है। लोगों का मानना है कि उन्होंने अपनी सभी पुस्तकें अपनी योग शक्ति से लिखी है। कहा जाता है कि उड़ीसा में एक लाख मालिका की पुस्तकें हैं जिनके अलल अलग विषय और नाम हैं। लेकिन इस समय कुछ सैंकड़ों पुस्तकों की ही जानकारी लोगों को है। हालांकि यह सभी पुस्तकें जगन्नाथ पुरी के महंतों के अधिकार में है। कहा जा रहा है कि वे इन पुस्तकों को हर किसी को नहीं दिखाते हैं।
 
पूर्वजन्म : संत के बारे में कहा जाता है कि उनकी पुस्तक में उनके अनेक जन्मों का विवरण भी है। सतयुग में वे एक महर्षि थे। त्रेता में नल नामक वानर बनकर उन्होंने श्रीराम की सेवा की और द्वापर सुदामा बनकर उन्होंने श्रीकृष्ण की भक्ति की। वहीं कलयुग में अच्युदानंद दास बनकर श्रीकृष्ण भक्ति के प्रचार में सहयोग किया। 
 
भविष्यवाणियों के मुख्य बिंदू ( bhavishya malika predictions) : उनकी भविष्यवाणियों में कलयुग में अकाल, युद्ध, विस्फोट, भूचाल, महामारी के साथ ही देशों के भविष्य को लेकर भी भविष्यवाणियां हैं। उन्होंने भारत, अमेरिका और रूस को लेकर भी भविष्यवाणी की है। उन्होंने ऐसे संकेत दिए हैं जिससे यह पता चल सके की यह भविष्यवाणियां कब घटित होने वाली है। उन्होंने जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी भविष्वाणियों के आधार पर ही विश्व की घटनाओं का उल्लेख किया है। उन्होंने कलयुग के अंत और इस काल में घटने वाली घटनाओं का भी जिक्र किया है। उन्होंने अपनी पुस्तक में यह भी बताया है कि महाभारत काल के योद्धा कलयुग में किस नाम से जन्म लेकर क्या कार्य करेंगे।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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