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Bhaum Pradosh 2021: भौम प्रदोष व्रत आज, जानें महत्व, कथा, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री एवं विधि

Updated: मंगलवार, 2 नवंबर 2021 (14:03 IST)
Bhaum Pradosh 2021 हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस बार कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन धनत्रयोदशी या धनतेरस का पर्व तथा भौम प्रदोष व्रत 2 नवंबर 2021, दिन मंगलवार को रखा जाएगा। भौम प्रदोष व्रत जब किसी भी मंगलवार के दिन प्रदोष तिथि का योग बनता है, तब यह व्रत रखा जाता है।

मंगल ग्रह का ही एक अन्य नाम भौम है। यह व्रत हर तरह के कर्ज से छुटकारा दिलाता है। धनतेरस के दिन आने से इसका महत्व और अधिक पढ़ गया है। दैनिक जीवन में कई बार अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें रुपयों-पैसों का कर्ज लेना आवश्यक हो जाता है। तब आदमी कर्ज या ऋण तो ले लेता है, लेकिन उसे चुकाने में उसे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में कर्ज संबंधी परेशानी दूर करने के लिए भौम प्रदोष व्रत लाभदायी सिद्ध होता है। इस दिन हनुमान जी की आराधना का भी  विशेष महत्व है।
 
List of Puja samagriपूजन की सामग्री सूची- 
 
मंगल (भौम) और प्रदोष के दिन निम्नलिखित सामग्री से अभिषेक-पूजन करना चाहिए, आइए जानें...
 
1. सफेद पुष्प
2. सफेद फूलों की माला
3. आंकड़े का फूल
4. सफेद मिठाइयां
5. सफेद चंदन
6. जल से भरा हुआ कलश
7. बेलपत्र
8. धतूरा
9. भांग
11. कपूर
10. आरती के लिए थाली
12. धूप
13. दीप
14. शुद्ध घी (गाय का हो तो अतिउत्तम)
15. सफेद वस्त्र
16. हवन सामग्री एवं आम की लकड़ी।

 
पूजन विधि- Pradosh Vrat Puja Vidhi 
 
* हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। इसमें मंगलवार और शनिवार को आने वाले प्रदोष तिथि का विशेष महत्व माना गया है।
 
* भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। इससे जातक के जीवन में मंगल ग्रह के कारण मिलने वाले अशुभ प्रभाव में कमी आती है।
 
* इस दिन ब्रह्म मूहूर्त में स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़कें।

 
* अब चौकी पर सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर मौली बांधें। भगवान शिवशंकर की प्रतिमा या शिवलिंग विराजित करें। अब कच्चा दूध मिले जल से अभिषेक करें और गंगाजल अर्पित करके फूल, धतूरा, भांग अथवा मौसमी फल चढ़ाएं। धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं तथा शिवजी की आरती करें, भोग लगाएं।
 
* इसी तरह सायंकाल को भी मुहूर्त के अनुसार शुभ समय में शिवजी का पूजन करें।
 
* अगर मंगलवार के दिन प्रदोष तिथि आती है, तो इसका महत्व अधिक बढ़ जाता है तथा कर्ज से मुक्ति के लिए इस दिन शाम के समय किया गया हनुमान चालीसा का पाठ लाभदायी सिद्ध होता है।

 
* इस दिन मंगल देव के 21 या 108 नामों का पाठ करने से ऋण से जातक को जल्दी छुटकारा मिल जाता है।
 
* इस व्रत-पूजन से मंगल ग्रह की शांति भी हो जाती है।
 
* मंगल ग्रह की शांति के लिए इस दिन व्रत रखकर शाम के समय हनुमान और भोलेनाथ की पूजा की जाती है।
 
* इस दिन हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ करके बजरंग बली को बूंदी के लड्डू अर्पित करके उसके बाद व्रतधारी को भोजन करना चाहिए।

 
* भौम प्रदोष का व्रत बहुत प्रभावकारी माना गया है। जहां एक ओर भगवान शिव व्रतधारी के सभी दुःखों का अंत करते हैं, वहीं मंगल देवता अपने भक्त की हर तरह से मदद करके उसे उस बुरी स्थिति से बाहर निकालने में उसकी मदद करते हैं। इस बार भक्त भगवान धन्वं‍तरि, लक्ष्मी जी, कुबेर तथा भगवान भोलेनाथ का पूजन भी करेंगे। 
 
Bhaum Pradosh 2021 Muhurat भौम प्रदोष पर पूजन के मुहूर्त-
 
 
इस बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ मंगलवार, 02 नवंबर को दिन में 11.31 मिनट से होगा और 03 नवंबर को प्रात: 09.02 मिनट पर इसका समापन होगा। त्रयोदशी तिथि के प्रदोष काल में प्रदोष व्रत का पूजन होता है, अत: प्रदोष व्रत 02 नवंबर को ही रखा जाएगा। 
 
Bhaum Pradosh Pradosh Time प्रदोष काल पूजन का समय- 

 
हिन्दी पंचांग के अनुसार, जो भक्त धनतेरस के दिन भौम प्रदोष व्रत भी रखेंगे, उनके लिए प्रदोष काल में शाम 05.35 मिनट से रात्रि 08.11 मिनट तक यानी 02 घंटे 36 मिनट का समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए प्राप्त होगा।
 
कथा- 
 
Bhaum Pradosh katha इस व्रत की कथा इस प्रकार है- एक नगर में एक वृद्धा रहती थी। उसका एक ही पुत्र था। वृद्धा की हनुमानजी पर गहरी आस्था थी। वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखकर हनुमानजी की आराधना करती थी। एक बार हनुमानजी ने उसकी श्रद्धा की परीक्षा लेने की सोची।
 
हनुमानजी साधु का वेश धारण कर वृद्धा के घर गए और पुकारने लगे- है कोई हनुमान भक्त, जो हमारी इच्छा पूर्ण करे? पुकार सुन वृद्धा बाहर आई और बोली- आज्ञा महाराज।
 
हनुमान (वेशधारी साधु) बोले- मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा, तू थोड़ी जमीन लीप दे। वृद्धा दुविधा में पड़ गई। अंतत: हाथ जोड़कर बोली- महाराज। लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य पूर्ण करूंगी।

 
साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाद कहा- तू अपने बेटे को बुला। मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा। यह सुनकर वृद्धा घबरा गई, परंतु वह प्रतिज्ञाबद्ध थी। उसने अपने पुत्र को बुलाकर साधु के सुपुर्द कर दिया।
 
वेशधारी साधु हनुमानजी ने वृद्धा के हाथों से ही उसके पुत्र को पेट के बल लिटवाया और उसकी पीठ पर आग जलवाई। आग जलाकर दु:खी मन से वृद्धा अपने घर में चली गई। इधर भोजन बनाकर साधु ने वृद्धा को बुलाकर कहा- तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी आकर भोग लगा ले।

 
इस पर वृद्धा बोली- उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न पहुंचाओ। लेकिन जब साधु महाराज नहीं माने तो वृद्धा ने अपने पुत्र को आवाज लगाई। अपने पुत्र को जीवित देख वृद्धा को बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी। हनुमानजी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए और वृद्धा को भक्ति का आशीर्वाद दिया।

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