तेनालीराम की कहानियां : स्वप्न महल


‘ठीक कहा आपने, महाराज! सपने सच नहीं हुआ करते। सपना चाहे अधर में लटके अनोखे महल का ही क्यों न हो और चाहे उसे महाराज ने ही क्यों न देखा हो, सच नहीं हो सकता।’


राजा कृष्णदेव राय हैरान होकर उस बूढ़े की ओर देख रहे थे। देखते-ही-देखते उस बूढ़े ने अपनी नकली दाढ़ी, मूंछ और पगड़ी उतार दी। राजा के सामने बूढ़े के स्थान पर खड़ा था।
इससे पहले कि राजा क्रोध में कुछ कहते, तेनालीराम ने कहा- ‘महाराज, आप मुझे अभयदान दे चुके हैं।’ महाराज हंस पड़े। उसके बाद उन्होंने अपने सपने के महल के बारे में कभी बात नहीं की

(समाप्त)



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