महाराष्ट्रीयन परिवारों में उत्सवी माहौल

महालक्ष्मी को लगेगा महानैवेद्य

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गुरुवार को मराठीभाषी परिवारों में विशेष रौनक नजर आ रही थी। हर कोई महालक्ष्मी के स्वागत के लिए उत्सुक था। मन में अटूट श्रद्धा व उत्साह के साथ में सुख-समृद्धि की कामना लिए महालक्ष्मी की स्थापना की गई। 'महालक्ष्मी आली सोन्याच्या पाउलाने आली' के आह्वान के साथ महालक्ष्मी को भक्तिभाव से विराजित किया गया। वहीं शुक्रवार को महालक्ष्मी को कई प्रकार के व्यंजनों का महानैवेद्य लगाया जाएगा।


गुरुवार को विधि-विधान से घर-घर में महालक्ष्मी की स्थापना ज्येष्ठा-कनिष्ठा के रूप में हुई। दोनों के मध्य में गणेश 'बाळा' स्थापित किए गए। मान्यतानुसार अपने मायके में आई महालक्ष्मी की खूब आवभगत की जाती है और परिवार का प्रत्येक सदस्य उनकी आवभगत में लगा रहता है।
शुक्रवार को सोलह प्रकार की सब्जियाँ, पूरणपोळी, लड्डू, कढ़ी, पातळभाजी आदि पकवानों का भोग लगाया जाएगा। इसी के साथ ब्राह्मण, सुहागिन, मुंजा आदि के साथ कई रिश्तेदार व परिचितों को भोजन कराया जाता है।

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आकार एक, फिर भी छोटी-बड़ी दिखती है :- महालक्ष्मी की एक खासियत है कि वैसे तो ज्येष्ठा कनिष्ठा दोनों के मुखौटे, धड़ व हाथ सभी बिलकुल एक समान आकार के होते हैं लेकिन स्थापित करने के बाद अपने आप ही छोटी व बड़ी दिखाने लगती हैं। यह किसी एक घर में नहीं बल्कि प्रत्येक घरों में ऐसा ही देखने को मिलता है।
इसके साथ ही घर की महिलाएँ रात में महालक्ष्मी के सामने एक कटोरी में हल्दी कुंकु समतल (प्लेन) करके रखती हैं, लेकिन सुबह उनमें अपने आप ही उँगलियों के निशान नजर आते है। मान्यता है कि रात्रि में महालक्ष्मी आकर हल्दी कुंकु लगाती है।



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