'सुपर 30’ की कामयाबी से खुश हैं आनंद कुमार

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
गरीब बच्चों को आईआईटी में दाखिले के लिए तैयार करने के सिलसिले में लगातार दो सालों तक सौ फीसदी सफलता दर्ज कराने वाली संस्था ‘सुपर 30’ के संस्थापक की ख्वाहिश है कि इस प्रयोग को शिक्षा की दूसरी विधाओं में भी लागू किया जाए।

सात साल पहले बिहार में ‘सुपर 30’ की शुरुआत की गई थी, जहाँ आर्थिक रूप से पिछड़े 30 संभावनाओं भरे बच्चों को चुनकर आईआईटी में दाखिले के लिए तैयार किया जाता है। ‘सुपर 30’ ने अभी तक सौ से भी ज्यादा आईआईटी के छात्र दिए हैं।

‘सुपर 30’ की संकल्पना देने वाले गणित के विद्वान आनंद कुमार अब चाहते हैं कि इस सफलतम प्रयोग को शिक्षा की दूसरी विधाओं में भी लागू किया जाए। उन्होंने इसके लिए इच्छुक लोगों की मदद करने की भी बात कही है।
कुमार ने कहा कि मुझे लगता है कि ऐसे प्रयोगों का विस्तार प्रशासनिक सेवाओं गणित व भौतिकी की ओलिम्पियाड परीक्षा और यहाँ तक कि पत्रकारिता के लिए भी गरीब बच्चों को तैयार करने के लिए किया जाना चाहिए।

सौ फीसदी सफलता दर्ज कराने वाले ‘सुपर 30’ के लिए बच्चों का चयन बिहार और झारखंड के दूरदराज के इलाकों से किया जाता है। कुमार ने कहा कि ‘सुपर 30’ का दायरा बढ़ाकर उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान तक किया जा रहा है। इसके लिए नए बैच की क्षमता 90 कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि हम इस बार बिहार और झारखंड के बाहर हिंदी पट्टी के दूसरे राज्यों के गरीब और प्रतिभाशाली बच्चों को ‘सुपर 30’ के लिए चुनने जा रहे हैं।

‘रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स’ के बैनर तले चलने वाला ‘सुपर 30’ छात्रों की पढ़ाई और उनके रहने की मुफ्त व्यवस्था देता है। उन्होंने कहा कि मैं खुश हूँ कि हमने किसानों, ऑटो रिक्शा चलाने वालों, खोमचे वालों जैसे लोगों के बच्चों को आईआईटी भेजा है।
गणित में कई शोधपत्र प्रकाशित करा चुके आनंद पैसे की दिक्कत के कारण कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी नहीं जा पाए थे। वे कहते हैं कि गणित के एक कोर्स में दाखिले के निमंत्रण के बावजूद मैं पैसे की दिक्कत के कारण कैम्ब्रिज नहीं जा पाया लेकिन मैं खुश हूँ क्योंकि मैंने अपने जैसी पृष्ठभूमि वाले बच्चों को भारत के सबसे प्रतिष्ठित कोर्स में दाखिले के लिए सक्षम बनाया है।



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