सोरेन की शर्मनाक हार, संकट में संप्रग सरकार

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
का मुख्यमंत्री बनने के करीब चार महीने बाद उपचुनाव के जरिये विधायक बनने का प्रयास कर रहे को गुरुवार को शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा और वे अचर्चित प्रतिद्वंद्वी गोपाल कृष्ण पातर से करीब आठ हजार मतों से हार गए।


मुख्यमंत्री की हार के साथ ही राज्य में सत्तारूढ़ संप्रग सरकार संकट में आ गई। हालाँकि वे इस्तीफे में देर करने का प्रयास कर रहे हैं। सोरेन पिछले साल 27 अगस्त को मुख्यमंत्री बने थे और उन्हें छह महीने के अंदर विधानसभा का सदस्य बनना है। यह अवधि 27 फरवरी को समाप्त हो रही है।

सोरेन ने इस्तीफे में देर करने का प्रयास करते हुए कहा कि वे आज या कल दिल्ली जाएँगे और राजद प्रमुख लालू प्रसाद सहित संप्रग के शीर्ष नेताओं और अन्य सहयोगी दलों से विचार-विमर्श के बाद ही कोई अंतिम फैसला करेंगे।

उन्होंने कहा मैं राज्य संप्रग अध्यक्ष मधु कोड़ा और अन्य सहयोगियों से भी मिलूँगा और अंतिम फैसला करने से पहले उनसे सुझाव माँगूगा। उधर, उपमुख्यमंत्री सुधीर महतो ने जमशेदपुर में कहा कि उपचुनाव में शिबू सोरेन की हार के बावजूद प्रदेश में संप्रग सरकार बनी रहेगी।


महतो ने कहा कि झामुमो जल्दी ही उपचुनाव के नतीजे की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा हम संप्रग के तहत ही वैकल्पिक व्यवस्था का प्रयास करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या संप्रग के किसी सहयोगी ने उपचुनाव में उनके खिलाफ काम किया, सोरेन ने कहा कि उन्होंने मुकाबले में हरेक सहयोगी पर भरोसा किया।
मुख्यमंत्री के रूप में यह सोरेन का दूसरा कार्यकाल है। इससे पहले वे 2005 में विधानसभा में खंडित जनादेश के बाद मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन उनका कार्यकाल सिर्फ नौ दिन का ही रहा और विश्वास मत परीक्षण के पहले ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

दूसरी बार सोरेन मुख्यमंत्री तब बने, जब उनकी पार्टी ने पिछले साल 17 अगस्त को मधु कोड़ा सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता प्रशस्त हुआ।
इस बीच मधु कोड़ा ने संकेत दिया है कि अगर संप्रग नेतृत्व मौजूदा घटनाक्रम के आलोक में उन्हें जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय करता है तो वे कार्यभार लेने के खिलाफ नहीं हैं।

कोड़ा ने कहा मैंने हमेशा संप्रग के दिशा-निर्देशों का पालन किया है। नेतृत्व जो भी कहेगा, मैं उसका पालन करने के लिए तैयार हूँ। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री भले ही चुनाव में हार गए हों, लेकिन संप्रग अभी भी सत्ता में है और हम मैदान नहीं छोड़ेंगे।
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पीएनसिंह ने कहा सोरेन को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा यह पूरे संप्रग की हार है और कांग्रेस को इसकी जिम्मेदारी लेना चाहिए।

तमाड़ में अपनी पार्टी की जीत के बाद एनोस एक्का ने कहा कि यह सोरेन की नहीं, बल्कि संप्रग की हार है। झारखंड पार्टी के अध्यक्ष एनोस एक्का को उपचुनाव में पातर की उम्मीदवारी वापस लेने से इनकार करने के बाद मुख्यमंत्री ने पिछले साल 18 दिसंबर को उन्हें अपनी कैबिनेट से बाहर कर दिया था।



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