अध्यात्म व विज्ञान का संगम है संगीत

अनुराग तागड़संगीत उनके रोम-रोम में बसा है...सहज, सरल और मृदुभाषी इस कलाकार का सामीप्य पाकर संगीत को न जानने वाला भी मुग्ध हो सकता है। पंडिजसराज शास्त्रीय संगीत की उस ऊँचाई पर हैं, जो बिरलों को ही नसीब होती है। पंडितजी का मानना है कि भले ही देश की जनसंख्या 110 करोड़ हो, पर शास्त्रीय संगीत के उच्च कोटि के कलाकार केवल 25 ही हैं।
रवींद्र नाट्यगृह जब नया बना था तो एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। तब एक ही दिन मेरा गाना, पं.सामता प्रसादजी का तबला और कुमारजी और उ. अमीर खाँ साहब का गाना था।



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