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Written By भाषा
पुनः संशोधित रविवार, 30 मार्च 2014 (17:28 IST)

सोशल मीडिया पर होने वाले खर्च पर कंपनियों की निगाह

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नई दिल्ली। मतदाताओं को आकर्षित करने के इरादे से राजनीतिक दल सोशल नेटवर्किंग साइट का जमकर उपयोग कर रहे हैं और अनुमान है कि इस पर 500 करोड़ रुपए तक का खर्च किया जा सकता है।

ऐसे में गूगल, फेसबुक तथा ट्विटर जैसी इंटरनेट कंपनियों का लोकसभा चुनावों में राजनीतिक दलों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले खर्च को अपने पास खींचने पर नजर है।

इस चुनाव में 81.4 करोड़ भारतीय मतदाता हैं, जो मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें 20 करोड़ से अधिक की पहुंच इंटरनेट तक है। इसमें करीब 10 करोड़ ऐसे हैं, जो फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया का खूब उपयोग करते हैं।

डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार आगामी लोकसभा में चुनावों में पहली बार मताधिकार का उपयोग करने जा रहे करीब 10 करोड़ सोशल नेटवर्किंग साइट पर काफी सक्रिय हैं और इन वोटरों को ध्यान में रखकर राजनीतिक दल इन तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया के उपयोग का रास्ता अपना रही हैं।

अनुमानों के अनुसार विभिन्न दलों का विज्ञापन और अन्य प्रचार-प्रसार पर 4,000 से 5,000 करोड़ रुपए का बजट है। इनमें से डिजिटल मीडिया पर कम-से-कम 400 से 500 करोड़ रुपए खर्च किए जा सकते हैं।

अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) का पिछले साल दिल्ली विधानसभा चुनावों में ऑनलाइन प्रचार-प्रसार प्रमुख हथियार के रूप में सामने आया। उसके बाद सभी राजनीतिक दलों के रणनीतिकार लोकसभा चुनावों में अपनी रणनीति में सोशल मीडिया को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।

डिजिटल मार्केंटिंग कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार कुछ प्रमुख राजनीतिक दल सोशल मीडिया का सोच-समझकर उपयोग कर रहे हैं और कुछ शहरी सीटों पर यह ‘पाशा पलटने वाला’ साबित हो सकता है।

विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्ययन के अनुसार कुल 543 लोकसभा सीटों में से 160 सीटों पर सोशल मीडिया के जरिए प्रचार का असर पड़ सकता है। छोटे राजनीतिक दल समेत विभिन्न पार्टियां अपने पक्ष में मततादाओं को रिझाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही हैं। (भाषा)