जरा याद करो कुर्बानी...

Girish SrivastavaND
एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, एसीपी अशोक काम्टे, सीनियर इंस्पेक्टर विजय सालस्कर, राजकीय रेलवे पुलिस में इंस्पेक्टर शशांक शिंदे, रेलवे सुरक्षा बल के प्रधान आरक्षक एमएल चौधरी, इंस्पेक्टर एआर चितले, उपनिरीक्षक प्रकाश मोरे एवं बाबू साहब दुरगुडे, एएसआई नानासाहेब भोंसले एवं वी. अबोले, आरक्षक विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल एवं योगेश पाटिल जैसे जाँबाजों ने कर्त्तव्य परायणता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राष्‍ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

इनके अतिरिक्त एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, हवलदार चंदर और हवलदार गजेन्द्रसिंह अलग-अलग जगह आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए।

एक बार फिर देश की अस्मिता बचाने के लिए भारत माता के वीर सपूतों ने अपनी जान कुर्बान कर दी। पर हुए देश के सबसे बड़े आतंकवादी हमले का मुकाबला करते हुए 15 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए।
साथ ही हमें उन लोगों को भी नही भूलना चाहिए जिनकी इन हमलों में मौत हुई है। 'करेज अंडर फॉयर' का सच्चा उदाहरण तथा ओबेरॉय के कर्मियों ने दिखाया है। भारी गोलाबारी के बावजूद अपनी जान की परवाह किए बिना इन होटलकर्मियों ने सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दुःखद घटना में अन्य लोगों के साथ बहुत से कर्मचारी भी मारे गए हैं।



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