जीडीपी 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
जर्मनी स्थित ड्रेस्डनर बैंक के अनुसार बढ़ी हुई मुद्रास्फीति और ऊँची ब्याज दरों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव होगा। भारत द्वारा इस वित्तवर्ष में 7.5 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की उम्मीद है, जो वर्ष 2007-08 में 9 प्रतिशत थी।


विश्व की प्रमुख बीमा कंपनी एलायंज ग्रुप के बैंकिंग खंड ड्रेस्डनर बैंक ने कहा कि इस वित्तवर्ष के लिए अब हम केवल 7.5 प्रतिशत जीडीपी विकास दर की उम्मीद करते हैं।

उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था विकास की गति खो चुकी है, जहाँ उत्पादन वृद्धि वर्ष 2008 के प्रथम 4 महीनों में पर्याप्त रूप से कम गया है।
डेस्डनर का अनुमान वित्त मंत्रालय के 8 से साढे़ 8 प्रतिशत के जीडीपी विकास दर के अनुमान से कहीं ज्यादा कम है। संप्रग सरकार ने अपने शासन के पहले चार वर्षों के दौरान औसतन 8.9 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। पिछले वित्तवर्ष में देश का जीडीपी विकास दर 9 प्रतिशत था जो उससे पहले के वर्ष में 9.6 प्रतिशत रहा।

मुद्रास्फीति में ताजा वृद्धि और ब्याज की ऊँची दरों ने उद्योग पर अपना असर डाला है तथा देश का उत्पादन विकास दर विगत चार महीनों में पर्याप्त रूप से धीमा हुआ है। वास्तव में मार्च में औद्योगिक विकास दर घटकर तीन प्रतिशत हो गई, लेकिन अप्रैल में सुधरकर 7 प्रतिशत हो गई।
एलायंज-ड्रेस्डनर इकोनोमिक रिसर्च ने अर्थव्यवस्था और बाजार पर अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि केवल एक ही क्षेत्र अपनी जिजीविषा को प्रदर्शित कर रहा है और वह सेवा क्षेत्र है जिसमें अभी भी दोहरे अंक की विकास दर है।

वर्ष 2007 के अंत में मुद्रास्फीति दर 3 प्रतिशत तक कम थी जो फिलहाल 11 प्रतिशत के स्तर के आसपास मंडरा रहा है। यह विगत 13 वर्षो का उच्चतम स्तर है।



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