दिल्ली पुलिस की योग्यता पर सवाल!

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
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पिछले साल जम्मू-कश्मीर के अल बद्र संगठन के दो उग्रवादियों की गिरफ्तारी के मामले की सीबीआई जाँच में कई ऐसी चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जिनसे दिल्ली पुलिस की विशेष सेल की योग्यता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।


जाँच से ऐसा खुलासा हुआ है कि दिल्ली पुलिस तथा उसके कुछ अधिकारी सबूतों से छेड़छाड़ के कारण परेशानी में पड़ सकते हैं। हालाँकि सीबीआई अधिकारियों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है, लेकिन एजेंसी के सूत्रों ने कहा है कि अल बद्र के कथित आतंकवादियों मोहम्मद मोआरिफ कुमर तथा इरशाद अली की गिरफ्तारी के मामले की जाँच एजेंसी ने अपने हाथ में ले ली है।
दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने फरवरी 2006 को उत्तरी दिल्ली में जीटी करनाल रोड पर मुबारक चौक से इन दोनों को गिरफ्तार किया था।


एजेंसी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर इस मामले की जाँच को अपने हाथ में लिया है और अब खुफिया ब्यूरो के दो अधिकारियों की भूमिका की जाँच की जा रही है। प्रारंभिक जाँच में इन दोनों अधिकारियों की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई है।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कुमर तथा अली के खिलाफ एकत्र किए गए सबूत विशेष सेल के अधिकारियों ने गढ़े थे। ये दोनों पुलिस के मुखबिरों के रूप में काम कर रहे थे। विशेष सेल अक्टूबर 2005 में सरोजिनी नगर बम विस्फोटों की जाँच में परिणाम दिखाने की जल्दबाजी में थी।

सीबीआई ने दिल्ली पुलिस द्वारा दोनों के खिलाफ दायर किए गए आरोप-पत्र में कई खामियाँ पाई हैं। इसमें एक खामी यह भी है कि कुमर और अली हथियार, गोला-बारूद तथा विस्फोटक लेने के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे और दोनों अल बद्र आतंकवादी संगठन के सदस्य हैं।
सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे यह आरोप पुख्ता होता हो कि वे अल बद्र के सदस्य हैं और वह भी ऐसी स्थिति में जब उनके पास से कोई संबंधित दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है।

हालाँकि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी नौ फरवरी को जम्मू-कश्मीर राज्य परिवहन निगम की बस से उतरते समय दिखाई है, लेकिन पुलिस ने इस संबंध में बस के चालक और कंडक्टर का बयान रिकॉर्ड करने की जरूरत नहीं समझी। न ही पुलिस ने दोनों के आवासों पर कोई छापामारी की और न ही पुलिस ने इस संबंध में जम्मू-कश्मीर पुलिस से ही कोई संपर्क किया।
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार यह हथियार तथा गोला-बारूद शेख परवेज तथा फैयाज अहमद रादार द्वारा उपलब्ध कराया जाना था। हालाँकि पुलिस ने इन दोनों को खोजने और पूछताछ करने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने सामान्य तरीके से उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट हासिल किया, जो किसी आवासी पते के अभाव में वापस लौट आया।
सीबीआई ने इस संबंध में विशेष सेल के दो अधिकारियों का वह बयान भी हासिल कर लिया है, जो दोनों आरोपियों के परिवारों के उन बयानों को सही ठहराता है कि कुमर और अली पुलिस मुखबिर के तौर पर काम कर रहे थे।

दोनों आरोपियों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि ये दोनों अधिकारी कुमर तथा अली पर दबाव डाल रहे थे कि वे जम्मू-कश्मीर में उग्रवादियों के साथ मिल जाएँ और बाद में उनके बारे में पुलिस को सूचनाएँ दें, लेकिन दोनों ने इस प्रस्ताव से इनकार कर दिया।
सीबीआई को इस बात की पूरी आशंका है कि इसी इनकार के चलते दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया होगा।



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