महँगाई मुख्‍य चुनावी मुद्‍दा-राजग

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
राजग गठबंधन के मुख्यमंत्रियों और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ने किसानों की कर्जमाफी को धोखा करार देते हुए इसे तथा महँगाई को प्रमुख चुनावी मुद्दे बनाने की रणनीति अपनाई है।

आगामी चुनावों की रणनीति तय करने के लिए आडवाणी के निवास पर यहाँ हुई राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की इस महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय किया गया।

बैठक में फैसला किया गया कि इन दोनों मुद्दों को चुनावी रणनीति के रूप में स्वीकार कर देशभर में रैलियों के जरिये जनता को गोलबंद किया जाएगा।
भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि बढ़ती महँगाई और कर्जमाफी के नाम पर किसानों के साथ हुए धोखे के मुद्‍दों पर जनता को अपने साथ जोड़ने को राजग की चुनावी रणनीति मान सकते हैं।

आने वाले दिनों में इन दोनों मुद्दों पर देशभर में रैलियाँ आयोजित किए जाने के बाद दिल्ली में भी विशाल रैली होगी। इन मुद्दों पर सड़कों पर जाने के साथ संसद में भी इसे जोर-शोर से उठाने का फैसला किया गया है।
उन्होंने बताया कि बैठक में सभी मुख्यमंत्रियों ने केन्द्र द्वारा उनके राज्यों के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्रियों ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए धन आवंटन से लेकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के आवंटनों और बिजली आवंटन तक में केन्द्र ने उनके साथ घोर भेदभाव किया है।

सुषमा ने कहा कि केन्द्र द्वारा राजग शासित राज्यों से भेदभाव किए जाने का एक नमूना यह भी है कि दिल्ली के एम्स की तर्ज पर छह अन्य आयुर्विज्ञान संस्थान खोलने के फैसले पर आगे इसलिए नहीं बढ़ा जा रहा है, क्योंकि इत्तेफाक से इन छहों राज्यों में राजग का शासन है।
जिन राज्यों में एम्स की तर्ज पर अस्पताल खोलने का राजग शासन के दौरान निर्णय किया गया था वे हैं- मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड।

अस्वस्थ होने के कारण बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजस्थान की मुख्यमंत्री वंसुधरा राजे नहीं आ सकीं, लेकिन उनके प्रतिनिधि के रूप में दोनों राज्यों के वरिष्ठ मंत्री उपस्थित थे।
बैठक में राजग घटक दलों के नेताओं के रूप में जनता दल (यू) के शरद यादव और शिवसेना के उद्धव ठाकरे आए। राजग संयोजक जॉर्ज फर्नांडीस भी बैठक में मौजूद थे।



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