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Written By भाषा
पुनः संशोधित मंगलवार, 30 अप्रैल 2013 (23:23 IST)

सीबीआई राजनीतिक दखलंदाजी से आजाद हो-सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कोयला खान आवंटन घोटाले की जांच रिपोर्ट सरकार के साथ साझा करने के केन्द्रीय जांच ब्यूरो के कृत्य पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इसने समूची जांच प्रक्रिया को झकझोर कर रख दिया है। न्यायालय ने साथ ही संकल्प किया कि जांच एजेन्सी को राजनीतिक प्रभाव और हस्तक्षेप से मुक्त कराया जाएगा।

सारे घटनाक्रम पर कठोर शब्दों के साथ उच्चतम न्यायालय की तल्ख टिप्पणियों के बीच कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला कांड में न्यायालय के निर्देशों से सरकार को कुछ राहत मिली है क्योंकि केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक को इस मामले में छह मई तक एक नया हलफनामा दाखिल करने का वक्त दिया गया है। न्यायालय इस मामले में अब आठ मई को आगे विचार करेगा।

इस मामले में दो घंटे की सुनवाई के बाद न्यायालय ने सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा से अनेक स्‍पष्‍टीकरण मांगे हैं। इसमें उन्हें यह भी बताना है कि आखिर क्यों आठ मार्च, 2013 को न्यायालय में पेश स्थिति रिपोर्ट में इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया कि रिपोर्ट का मसौदा राजनीतिक आकाओं को दिखाया गया था।

न्यायालय यह भी जानना चाहता है कि अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल हरेन रावल ने 12 मार्च को कैसे यह दावा किया कि रिपोर्ट का मसौदा किसी को दिखाया नहीं गया है।

न्यायमूर्ति आरएम लोढा, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने यह भी सवाल किया है कि 26 अप्रैल के हलफनामे में सीबीआई ने स्थिति रिपोर्ट के मसौदे में बदलाव के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी और कानून मंत्री अश्विनी कुमार तथा प्रधानमंत्री कार्यालय और कोयला मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा और किसके कहने पर ऐसा किया गया था।

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही न्यायाधीशों ने कहा कि सीबीआई के निदेशक के हलफनामे से बहुत बेचैन करने वाले तथ्यों का पता चला है और इससे जांच प्रक्रिया की बुनियाद ही हिल गई है। (भाषा)