राष्ट्रपति बनाने का फैसला पार्टियाँ करेंगी-सोमनाथ

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा| पुनः संशोधित रविवार, 3 जून 2007 (18:09 IST)
राष्ट्रपति पद के लिए तेज होती कवायद के बीच लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इस पद के लिए अपनी उम्मीदवारी के बारे में नकारात्मक राय जाहिर नहीं की, लेकिन कहा कि इस बारे में निर्णय वह राजनीतिक दलों पर छोड़ते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष पद पर तीन साल पूरे होने पर रविवार को चटर्जी ने कहा कि इस बारे में फैसला राजनीतिक दलों, सांसदों और विधायकों को करना है। यह मामला किसी एक आदमी की राय पर आधारित नहीं होगा। मैंने किसी से बात नहीं की है। किसी ने मुझसे भी बात नहीं की है।

उन्होंने कहा कि मेरे कुछ मित्र हैं। विभिन्न दलों में भी मेरे मित्र हैं, लेकिन इसका देश के राष्ट्रपति पद से कोई लेना-देना नहीं है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले समाजवादी पार्टी ने कहा था कि अगर चटर्जी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाता है तो वह उनका समर्थन करेगी।

यह पूछे जाने पर कि क्या संसद और विधि के क्षेत्र में अपने लंबे अनुभव के कारण वह खुद को राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के योग्य मानते हैं तो चटर्जी ने कहा कि केवल मेरे नाम को लेकर चल रही अटकलों के कारण मैं उम्मीदवार नहीं बन जाता।
उन्होंने कहा कि जब उन्हें लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया था तब भी उन्हें आश्चर्य हुआ था। उन्होंने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की ही ताकत थी कि वह सत्तारूढ़ दल का सदस्य न होते हुए भी लोकसभा अध्यक्ष चुने गए।

चटर्जी ने कहा कि एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर हैरत जताई थी कि वह लोकसभा में दस फीसदी से भी कम सांसदों वाली पार्टी के सदस्य होने के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष कैसे बन गए।
मीडिया पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि अब ओपीनियन पोल के माध्यम से पूछा जा रहा है कि अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा, जबकि आम नागरिक इसके लिए मतदाता ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश चुनाव के बारे में किए गए तमाम पूर्वानुमान और एग्जिट पोल गलत साबित हुए।

चटर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति पद देश की एकता और मूल्यों पर आस्था का प्रतीक है तथा मीडिया को इस बारे में अटकलें नहीं लगाना चाहिए।
राष्ट्रपति पद के मुद्दे से संबंधित सवालों के बारे में उन्होंने कहा कि बहुत दबाव महसूस होता है। यह मामला किसी एक व्यक्ति की राय पर निर्भर नहीं है और न ही किसी एक व्यक्ति की राय मायने रखती है।

यह पूछे जाने पर कि क्या लोकसभा अध्यक्ष पद पर तीन साल बिताने के बाद अब किसी अन्य संवैधानिक पद पर जाने का समय नहीं आया है। चटर्जी ने कहा कि मैं कभी विधायक नहीं रहा। मैं जिला परिषद का सभापति बनना चाहता हूँ। कभी मैं कोलकाता का मेयर बनना चाहता था, लेकिन मेरी पार्टी (माकपा) ने मुझे ऐसा नहीं करने दिया।



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