जसवंत ने पीएसी का अध्यक्ष पद छोड़ा

नई दिल्ली| भाषा|
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भाजपा के बार-बार के आग्रह के बावजूद लोक लेखा समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से इनकार करते आ रहे, पार्टी से निष्कासित वरिष्ठ नेता अचानक इस प्रतिष्ठित समिति के प्रमुख के पद से बुधवार को हट गए।

इस नए घटनाक्रम से यह अटकलें लगने लगी हैं कि कहीं जसवंत और भाजपा के बीच मेल-मिलाप का सिलसिला तो शुरू नहीं होने जा रहा है। इकहत्तर वर्षीय सिंह ने हालाँकि भाजपा में फिर से जाने की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने समिति के अध्यक्ष पद से हटने का निर्णय किसी ‘दबाव या गणित’ के तहत नहीं किया है।

सिंह ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसे उन्होंने आज मंजूर कर लिया। पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव के बाद भाजपा ने ही जसवंत का नाम इस समिति के लिए आगे बढ़ाया था। सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के नाते परंपरानुसार उन्हें इसका अध्यक्ष बनाया गया।
इसके बाद जसवंत द्वारा जिन्ना पर लिखी पुस्तक में पाकिस्तान के संस्थापक की सराहना किए जाने और देश के विभाजन के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं बताए जाने से उठे विवाद पर भाजपा ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था।

तत्पश्चात उन पर पीएसी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का पार्टी की ओर से लगातार दबाव बनता रहा और इस संदर्भ में भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने उनसे अलग से मिलकर ऐसा करने का आग्रह भी किया, लेकिन जसवंत नहीं माने।
इस बीच उन्होंने समिति की कुछ बैठकों की अध्यक्षता भी की लेकिन अंतत: सोमवार को उन्होंने अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दिया।

अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे जसवंत के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है, लेकिन यह 31 दिसंबर से प्रभावी माना जाएगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वे समिति से संबंधित तीन रिपोर्टों का काम पूरा कर सकें। पीएसी अध्यक्ष के रूप में उनका औपचारिक कार्यकाल अगले साल मार्च में समाप्त होगा। वे छह अगस्त को इस पद पर आसीन हुए थे।
अपने इस कदम के बारे में सिंह ने कहा कि मैं कुछ बिंदु स्थापित करना चाहता था, जो स्थापित हो गए हैं। यह बिंदु है संसदीय समितियों की स्वायत्त कार्यप्रणाली की सर्वोच्चता को रेखांकित करना। जिन्ना पर लिखी विवादास्पद पुस्तक के लिए भाजपा ने उन्हें बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए या चेतावनी दिए 19 अगस्त को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। (भाषा)


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