गणित में मध्यप्रदेश के बच्चे अव्वल

भोपाल (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित रविवार, 8 फ़रवरी 2009 (13:02 IST)
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के लिए यह खुशखबरी है कि उसके स्कूली बच्चों को कोई फिसड्डी नहीं कह सकता क्योंकि वे जोड़-घटाव और गुणा-भाग जैसे के सवालों को हल करने में दूसरे राज्यों के बच्चों के कान कतरने लगे हैं।


प्रदेश के बारे में यह खुलासा 'असर 2008' नामक रिपोर्ट में हुआ है जो देशभर में 'प्रथम' नामक एक गैरसरकारी संस्था ने कराया है। इस सर्वेक्षण में देश के 16 हजार गाँवों को शामिल किया गया है।

राज्य के लिए इस रिपोर्ट में अच्छी खबर यह भी है कि उसके स्कूली बच्चे गणित के इन सवालों को हल करने में केरल जैसे शत प्रतिशत शिक्षित राज्य के बच्चों से भी आगे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल प्रदेश में प्राथमिक पाठशालाओं के पहली से पाँचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों का शैक्षिणक स्तर सुधरा है। विशेषकर गणित में तो दीगर राज्यों के प्रथमिक स्कूल के बच्चों से काफी आगे निकल गए हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार पाँचवीं कक्षा के 78 प्रतिशत विद्यार्थी दूसरे राज्यों के इसी कक्षा के बच्चों से बेहतर भाग लगा सकते हैं तो पहली कक्षा के विद्यार्थी भी किसी से कमजोर नहीं हैं और 91 प्रतिशत विद्यार्थियों को एक से नौ तक की गिनती कंठस्थ है।


इसी प्रकार घटाव में इस प्रदेश के विद्यार्थी दूसरे स्थान पर हैं और तीसरी कक्षा के 72 प्रतिशत बच्चे घटाव के सवाल हल करने में माहिर हैं जबकि वर्ष 2007 में केवल 62 प्रतिशत बच्चे ही घटाव के सवाल जानते थे।
पाठ पढ़ने के कौशल का जिक्र करते हुए रिपोर्ट कहती है कि इस राज्य के बच्चों में पाठ पढ़ने का प्रवाह देशभर में सबसे अच्छा है। पाँचवीं कक्षा के 85 प्रतिशत विद्यार्थी पहली से लेकर चौथी कक्षा के सभी पाठ धाराप्रवाह पढ़ लेते हैं।

रिपोर्ट कहती है कि प्राथमिक एवं माध्यमिक पाठशालाओं में पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक के केवल 63 प्रतिशत बच्चे ही घड़ी देखना जानते हैं जबकि करेंसी नोट अथवा सिक्कों की पहचान रखने वाले बच्चों की संख्या 76 प्रतिशत तक है। पहली कक्षा के क्रमशः नौ एवं 23 प्रतिशत बच्चे ही समय बता सकते हैं और करेंसी नोट अथवा सिक्के की पहचान रखते हैं।



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