टॉकिज का गेट बंद...शो इज गोइंग ऑन

इंदौर (भाषा) | भाषा| पुनः संशोधित रविवार, 4 मई 2008 (21:53 IST)
क्या आप ऐसा टॉकिज देखना चाहते हैं, जिसके मुख्य द्वार पर ताला लटका हो। इसके बाद भी भीतर सीटियों और तालियों की गूँज के बीच दर्शक फिल्म का भरपूर लुत्फ ले रहे हों। यदि हाँ तो आपकी यह ख्वाहिश इंदौर में पूरी हो सकती है।


शहर के व्यस्ततम महात्मा गांधी रोड पर स्थित रीगल टॉकिज एक बार फिर चर्चाओं में है। पहले सिनेमाघर की विवादास्पद लीज से जुड़े मामले को कांग्रेस की ओर से मध्यप्रदेश विधानसभा में जोर-शोर से उठाया गया और अब यह छबिगृह पेचीदा, लेकिन दिलचस्प पचड़े में फँस गया दिखता है।

लंबी जद्दोजहद के बाद नगर निगम ने 2 अप्रैल को सिनेमाघर की लीज निरस्त कर दी। साथ ही इसके मुख्य द्वार पर ताला जड़ते हुए कब्जा लेने में भी देर नहीं की। उस वक्त ऐसा लगा कि कई बरसों से लोगों का मनोरंजन करता आ रहा रीगल हमेशा के लिए बंद हो गया है, लेकिन यह अनुमान गलत साबित हुआ।

सिनेमाघर संचालकों ने जिला अदालत के हालिया आदेश के बाद नगर निगम के कब्जे को नकारते हुए दोबारा फिल्म प्रदर्शन शुरू कर दिया है, मगर दर्शकों को दूसरे दरवाजे से प्रवेश दिया जा रहा है।


नगर निगम के वकील नवीन नवलखा कहते हैं क‍ि सिनेमाघर संचालकों ने अदालत के आदेश का अपनी सहूलियत से मतलब निकाल लिया। अदालत ने टॉकिज संचालकों की मुख्य द्वार पर लगा ताला खुलवाने से जुड़ी याचिका खारिज कर दी है। साथ ही यथास्थिति कायम रखने को भी कहा गया है।
नगर निगम का आरोप है कि संचालकों ने मुख्य द्वार पर लगा ताला खुलने से पहले फिल्मों का प्रदर्शन शुरू करके न केवल अदालत की अवमानना की है, बल्कि यह दर्शकों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।

निगम के आयुक्त नीरज मंडलोई ने कहा क‍ि हमने अदालत में रीगल के खिलाफ अवमानना याचिका पेश की, जिस पर सिनेमाघर संचालकों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
मंडलोई का कहना है कि फिलहाल जिस गेट से दर्शकों को सिनेमाघर में प्रवेश दिया जा रहा है, उसका जिक्र सरकारी रिकॉर्ड में कहीं नहीं है। साथ ही सिनेमाघर में भगदड़ या अग्निकांड की स्थिति में बड़ी जनहानि की आशंका भी गहरा गई है। निगम ने आबकारी विभाग से अनुरोध किया है कि दर्शकों की सुरक्षा के मद्देनजर सिनेमाघर का लाइसेंस रद्द किया जाए।
गौरतलब है कि रीगल के निर्माण के लिए इंदौर के तत्कालीन मराठा शासक तुकोजीराव होलकर ने वर्ष 1930 में लीज पर जमीन दी थी। इसके चार साल बाद यानी वर्ष 1934 में सिनेमाघर बनकर तैयार हुआ। रीगल करीब 23 हजार नौ सौ सेंतालीस वर्ग फुट जमीन पर खड़ा है। इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपए आँकी जा रही है। नगर निगम वहाँ विशाल वाणिज्यिक केंद्र बनाना चाहता है।



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