एड्स : अभी लंबी है जंग

भारत में 80 से 90 प्रतिशत लोगों को इस बात की जानकारी है कि एड्स कैसे फैलता है। लेकिन वे जानते हुए भी एड्स से बचने के व्यावहारिक उपाय नहीं अपनाते। नए संक्रमण में 30 से 35 प्रतिशत युवा जिम्मेदार हैं, इसलिए युवाओं को भी इस बारे में सजग होना जरूरी हैं।
दुनियाभर के देशों में एड्स के खिलाफ काम कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्था यूएन एड्स के प्रोग्राम सहायक उपहारसिंह भारत के बारे में कहते हैं-भारत में एचआईवी का सबसे ज्यादा प्रभाव छह राज्यों में है। दक्षिण भारत में तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक, पश्चिम में महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर में नागालैण्ड और मणिपुर।

असुरक्षित यौन संबंध एचआईवी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है, जो आबादी एचआईवी संक्रमण के मामले में सबसे ज्यादा असुरक्षित है, वे हैं व्यावसायिक यौन कर्मी, समलैंगिक, नशा करने वाले और एचआईवी पॉजिटिव माँताओं के नवजात शिशु।

यूएन एड्स का कहना है कि साल 2008 के अंत तक आठ सालों में बचाव के उपायों और दवाइयों की मदद से संक्रमण में 17 प्रतिशत की कमी हुई है। अफ्रीका का सब सहारा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बना हुआ है, क्योंकि यहाँ 67 फीसदी लोग इस वायरस से पीड़ित हैं, जबकि दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्वी एशिया में 38 लाख लोग संक्रमण से ग्रस्त हैं।

माना जाता है कि दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया के बाद एड्स से बीमार लोगों के मामले में भारत का स्थान तीसरा है, लेकिन हाल के वर्षों में देश में एड्स के फैलाव में कमी आने का दावा किया गया है।

भारत में एड्स के खिलाफ कई राज्यों में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था ममता के निदेशक डॉ. सुनील मेहरा कहते हैं-हमारा नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे बताता है कि देश में 80 से 90 प्रतिशत लोगों को इस बात की जानकारी है कि एड्स कैसे फैलता है। लेकिन लोग जानते हुए भी एड्स से बचने के व्यावहारिक उपाय नहीं अपनाते हैं। नए संक्रमण में 30 से 35 प्रतिशत युवा जिम्मेदार हैं, इसलिए युवाओं को भी इस बारे में सजग होना जरूरी हैं।

DW|
दुनियाभर में आज दिवस मनाया जा रहा है। यह कोशिश है इस लाइलाज बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाने की। जिससे न सिर्फ लोग इससे बच सकें, बल्कि बीमारी का शिकार बन चुके लोगों के प्रति भी भेदभाव को कम किया जा सके। और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में एड्स के मरीजों की संख्या तीन करोड़ 34 लाख तक हो गई है। इनमें 21 लाख बच्चे हैं, जबकि 2008 में तकरीबन 27 लाख नए लोग एचआईवी और एड्स से पीड़ित हुए। वायरस के शिकार ज्यादातर लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों से हैं, लेकिन आज एड्स दुनियाभर के सभी देशों के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए खतरा बना हुआ है। इसका पहली बार 1981 में पता चला। अब तक ढाई करोड़ लोग बीमारी से मर चुके हैं और तकरीबन हर दिन साढ़े सात हजार लोगों को नया संक्रमण होता है।
एड्स से बचाव के लिए बनाए गए अब तक पचास टीकों का मनुष्यों पर परीक्षण हो चुका है। हालाँकि थाईलैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा टीका बनाया है, जो एड्स फैलाने वाले वायरस एचआईवी के खतरे को तीस प्रतिशत तक कम करता है, लेकिन यह टीका पूरी तरह कारगर नहीं है।


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