पढ़ाने के लिए छोड़ी सरकारी नौकरी

WD| पुनः संशोधित शनिवार, 21 जुलाई 2012 (16:31 IST)
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क्या कोई केंद्रीय अधिकारी के पद को छोड़कर निजी संस्थान में अध्यापन का रुख करेगा। शानदार वेतन, लालबत्ती वाली लग्जरी कार, शानदार दफ्तर, मोटा वेतन। जेपी उपाध्याय ने यही सब किया है। वे भविष्य निधि आयुक्त का पद छोड़कर इंदौर के एक गैर सरकारी प्रबंध संस्थान में निदेशक के पद पर प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं।

सरकारी नौकरी करते हुए एमबीए और प्रबंधन में आईआईटी दिल्ली से डॉक्टरेट हासिल कर चुके डॉ. उपाध्याय पढ़ने और पढ़ाने में जुनून की हद तक मसरूफ रहते हैं। वे भवि‍ष्य निधि संगठन में बड़े-बड़े पद ठुकराकर पिछले दस सालों वे केवल प्रशिक्षण की कमान संभाले हुए हैं।

वे केंद्रीय कार्मिक विभाग के नेशनल रिसोर्स पर्सन हैं और दिल्ली में भविष्य निधि की राष्ट्रीय अकादमी में आयुक्त स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षण देते रहे हैं। वे तीन साल अफगानिस्तान रहे और वहां भविष्य निधि संगठन का ढांचा तैयार करने के साथ यह महकमा संभालने वाले अफसरों की फौज तैयार की।
देश के एक प्रसिद्ध बिजनेस स्कूल के निदेशक पद के विज्ञापन के आधार पर उन्होंने आवेदन भेजा। एक अभा चयन समिति ने चार स्तरीय साक्षात्कार के बाद उनका चयन किया। अब वे यह नई जिम्मेदारी संभालेंगे। (एजेंसियां)



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