चीन से सबक लेगा भारत-रमेश

संयुक्त राष्ट्र (भाषा)| भाषा|
पर्यावरण मंत्री ने चीनी राष्ट्रपति द्वारा शिखर वार्ता में जताई गई प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि धरती को बचाने के लिए भारत चीन से सबक ले सकता है।


उन्होंने कहा कि चीन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह इस मुद्दे पर काफी सक्रिय और आक्रामक है। इन सबसे भारत को सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें किसी बहाने की आड़ नहीं लेनी चाहिए तथा हमें स्वैच्छिक आधार पर उपचारात्मक कदम उठाने चाहिए।

जयराम रमेश ने कहा कि हम भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बाध्यकारी लक्ष्य न मानें लेकिन घरेलू स्तर पर हम जो भी करें उसकी विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय तौर पर होनी चाहिए। यह अभी और कोपेनहेगेन के बीच की सबसे बड़ी चुनौती है।

भारत और चीन अगले महीने दिल्ली में होने वाली एक तकनीकी कार्यशाला में भाग लेंगे। इसमें दोनो देश जलवायु परिवर्तन पर अपने राष्ट्रीय कार्ययोजना की प्रस्तुतियाँ तैयार करेंगे।


रमेश ने बताया कि हम जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर दोनो देशों के बीच समझौतों के तरीके और साधन ढूँढने पर विचार कर रहे हैं। जयराम रमेश ने इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर, जर्मनी और डेनमार्क से द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में होने वाली अनौपचारिक बैठकें वहाँ होने वाली औपचारिक वार्ताओं से ज्यादा प्रभावी होती हैं।
भारत-जापान की लंबी भागीदारी : पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने प्रदूषणमुक्त तकनीक के क्षेत्र में जापान के साथ लंबी अवधि की भागीदारी की आशा जताई है। उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री युकियो हातोयामा के संदेश की सराहना करते हुए कहा कि वे साहसी हैं और उन्होंने बहुत खास प्रतिबद्धता जताई है।

ओबामा का भाषण आधारहीन : रमेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भाषण को ‘प्रेरणादायी’ लेकिन ‘आधारहीन’ बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ठोस बात नहीं की।



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