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Written By भाषा
पुनः संशोधित शनिवार, 24 अगस्त 2013 (09:32 IST)

नवाज शरीफ ने फांसी पर रोक लगाई

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शुक्रवार को गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह नए राष्ट्रपति के कार्यभार संभालने तक देश में फांसी की सजा पर रोक लगा दे। नए प्रधानमंत्री नौ सितंबर से कार्यभार संभाल लेंगे।

शरीफ ने कल रात राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से भेंट की। इस भेंटवार्ता के दौरान जरदारी ने प्रधानमंत्री से कहा कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की पिछली सरकार ने अपनी नीतियों के आधार पर पिछले पांच वर्षों से आतंकवादियों और अपराधियों को दी जाने वाली फांसी को रोक दिया था।

‘एक्सप्रेस न्यूज’ की खबर के अनुसार, जरदारी ने इच्छा जताई कि यह रोक उनके राष्ट्रपति काल, नौ सितंबर तक जारी रहनी चाहिए। नौ सितंबर के बाद पीएमएल-एन सरकार अपने नए राष्ट्रपति ममनून हुसैन के साथ इस निर्णय पर फिर से विचार कर सकती है।

चूंकि फांसी की सजा देने का अंतिम अधिकार राष्ट्रपति को है इसलिए शरीफ ने गृहमंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह मौत की सजा के मामलों में फांसी पर फिलहाल रोक लगा दे।

पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद जरदारी नौ सितंबर को राष्ट्रपति के पद से हट रहे हैं। हुसैन इसी दिन कार्यभार संभालेंगे। हुसैन प्रधानमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं। इस वर्ष पाकिस्तान में 11 मई को हुए आम चुनाव में शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन ने पीपीपी को भारी आंतर से हराया था।

पीएमएल-एन सरकार पिछले महीने चार दोषियों को फांसी का सजा देकर इस रोक को समाप्त करने वाली थी लेकिन जरदारी द्वारा इस मुद्दे पर शरीफ से बातचीत करने की इच्छा जताने पर सरकार ने इस कदम पर रोक लगा दिया। शरीफ ने पहले ही कहा कि वह मौत की सजा के मामले में नीति पर किसी भी धमकी से नहीं डरेंगे। तालिबान ने कहा है कि किसी भी आतंकवादी को दी गई फांसी को वह युद्ध की घोषणा मानेगा।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में 7000 से ज्यादा कैदियों को मौत की सजा दी जानी है।

जरदारी द्वारा जून 2008 से फांसी की सजा पर रोक लगाए जाने के बाद से सिर्फ एक बार फांसी की सजा दी गई है। देश की सैन्य अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए एक सैनिक को नवंबर 2012 में फांसी दी गई। (भाषा)