हिटलर के जीवन का एक पहलू यह भी

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- वेबदुनिया न्यूज

सत्तर से अधिक वर्ष पहले जर्मन की नौकरानी रही रोजा मिटरेर का कहना है कि वह एक बहुत अच्छा मालिक था। हालाँकि ज्यादातर लोग उसे एक ऐसे व्यक्ति के नाम से याद करते हैं जिसके कारण लाखों लोगों की मौत हुई और करोड़ों लोग दु:खी हुए, लेकिन हिटलर की सेवा में रही नौकरानी को हिटलर के नाम से डर नहीं लगता है वरन वे उसे एक सम्य और भावुक आदमी के रूप में याद करती हैं।

इस समय 91 वर्षीया रोजा 1930 के दशक में जर्मनी के बावेरिया स्थित पहाड़ पर बने शानदार आवास में नौकरानी के रूप में काम करती थीं। अब तक उन्होंने प्रतिज्ञा ले रखी थी कि वे हिटलर के साथ अपने अनुभवों के बारे में कभी कुछ नहीं बताएँगी लेकिन उन्होंने महसूस किया कि उनके मरने के साथ ही हिटलर के बारे में उनकी जानकारी भी गुम हो जाएगी तो उन्होंने इस बारे में कुछ कहना ठीक समझा। वे द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के कुछ वर्षों के दौरान हिटलर के लिए काम करती थीं।
वर्ष 1932 में मात्र 15 वर्ष की आयु में रोजा क्रुअटेनबाखर हिटलर की नौकरी करने गई थीं। उनकी बहन एनी ने भी हिटलर के लिए 1920 के दशक में हिटलर के बरखटेसगाडेन रिट्रीट में कुक के रूप में नौकरी की थी। अपनी बहन के कारण वे हिटलर के बंगले पर नौकरी करने गई थीं। हिटलर ने ही उनकी बहिन से कहा था कि उसे एक नौकरानी की जरूरत है।

बंगले के किचन में ही हिटलर और रोजा का पहली बार आमना सामना हुआ था। जब उन्होंने बताया कि वे एनी की बहिन हैं तो हिटलर सुनकर मुस्कराया था क्योंकि एनी उसकी प्रिय नौकरानियों में से एक थी। जब उनसे पूछा जाता है कि हिटलर कैसा था तो उनका यही कहना है कि 'आप उसे चाहे जैसा मान सकते हैं लेकिन मैंने उन्हें सदा ही एक दयावान आदमी के रूप में पाया। इतना नही नहीं, वे परिपूर्ण मालिक (परफेक्ट बॉस) थे।'
कहा जाता है कि हिटलर की एक पूर्व हाउसकीपर गेली रोबल से उसके प्रेम संबंध थे। पर गेली ने सितंबर 1931 में खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। जब वे अगले वर्ष सितंबर 1932 में हिटलर के बंगले पर काम करने पहुँची थीं तो उनसे कहा गया कि वे एक साल बाद दुर्घटना के दिन हिटलर से मिलने की कोशिश नहीं करें।

यहीं हिटलर के बंगले में उन्होंने बड़े-बड़े नाजी नेताओं को आते-जाते देखा था। उन्होंने यहाँ पार्टी सचिव हिमलर, बोरमैन को देखा था। बोरमैन को वे डर्टी पिग कहती हैं और चौड़े पैरों वाला, सेक्स को लेकर खब्ती गोयबल्स जैसा प्रचार मंत्री भी बंगले पर आया करता था। बरगॉफ नाम के बंगले में एक समय तो केवल एनी और रोजा की नौकरानियाँ थीं।
रोजा का कहना है कि बंगले में उनका कमरा हिटलर के कमरे के ठीक उपर था और वे उसे रोते तक सुन सकती थीं। उन्हें अच्छी तरह याद है जबकि पहली बार उनके मालिक ( हिटलर) ने उन्हें काम बताया था। वे घर में पोर्सलिन के कप सुखा रही थीं कि सामने की सीढ़ियों से हिटलर उतर कर आए और उन्होंने बड़ी नरमी से कहा - हेलो, आपको तकलीफ देने के लिए माफी चाहता हूँ कि क्या आप कुछ कॉफी बनाकर और थोड़े से जिंजरब्रेड बिस्क‍िट्‍स मेरे स्टडी रूम में ला देंगी ?
हिटलर के इतने पास आकर यह बात कहने भर से रोजा को लगा कि वे बेहोश हो जाएँगी लेकिन वे जल्दी ही बरगॉफ में अपने जीवन की आदी हो गईं। वे सुबह बजे उठकर सबसे पहले तीन जर्मन शेफर्ड कुत्तों को खाना देती थीं जिनके नाम वूल्फ, मक और ब्लाँडी थे।

उन दिनों हिटलर अपने स्टडी रूम में सोते थे। साधारण से उनके कमरे में लोहे का एक पलंग, एक वार्डरोब, एक मेज, दो कुर्सियाँ और एक शू-बॉक्स था। इस कमरे में बहुत थोड़ा सा फर्नीचर था और कमरे में बिस्तर के पास उनकी माँ की एक तस्वीर टँगी रहती थी।
रोजा का कहना है कि बरगॉफ में काम करने के लिए उन्हें नाजी पार्टी का सदस्य या कुछ और होने की जरूरत नहीं थी। थोड़े दिन बाद वे भी बंगले में सहज, सामान्य हो गईं। वे कहती हैं कि यह हिटलर के आदेश थे कि एनी और रोजा को प्रत्येक रविवार को चर्च ले जाया जाए क्योंकि वह सोचते थे कि यह बात हम दोनों के लिए अच्छी होगी।

उन्हें अच्छी तरह याद है कि जब दूसरी बार हिटलर किचन में आए। उन्होंने रोजा को देखा और कहा, 'अरे, मैं देख रहा हूँ कि हमारी छोटी वाली थोड़ी मोटी हो गई है।' रोजा का काम था कि वह चिट्‍ठियों को छाँटे और उन्हें हिटलर की मेज तक पहुँचाए। ये पत्र हजारों की संख्या में आया करते थे।
बंगले में बड़ी संख्या में सिगार, जैम के भरे जार, फूल और तस्वीरें होती थीं जिन्हें हिटलर के आदेश पर वे पास में रहने वाले गरीब किसानों के परिवारों में बाँट दिया करती थीं। बंगले में काम करते हुए रोजा को इवा ब्राउन को भी देखने का मौका मिला जिन्हें हिटलर ने अपने शासन काल के दौरान लोगों की निगाह से पूरी तरह अलग रखा। वे कहती हैं कि इवा कोई बहुत अधिक सुंदर नहीं थी।
रोजा बताती हैं कि हिमलर तस्वीरों में जैसा दिखाई देता है उससे भी कम पतला था। और गोयबल्स दोनों ही हमेशा ही वहाँ रहा करते थे। बोरमैन वे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थीं। वह एक गंदा सुअर था। 1934 के अंत तक बंगला माइनफील्ड्स और एसएस चेकपोस्ट्‍स से घिर गया था। वे तब अपने को एक कर्मचारी की बजाय कैदी महसूस करने लगी थीं।

वर्ष 1935 में जब वे एक स्थानीय कारोबारी जोसेफ एमोर्ट्‍स के प्रेम में पड़ गईं और उन्होंने नौकरी छोड़ने का नोटिस दे दिया। तब उनसे कहा गया था कि वे तुरंत ही नौकरी छोड़कर जा सकती हैं। इसके बाद रोजा और हिटलर मात्र एक और बार मिले। 10 दिसंबर, 1936 को एनी ने बरगॉफ के मैनेजर हरबर्ट डोहरिंग से विवाह किया था। तब हिटलर विवाह में आया था और उसने कहा कि वह उनकी कमी महसूस करता है।
वर्ष 1939 में रोजा का विवाह हो गया और उन्होंने तीन बेटियों को जन्म दिया। बाद में उन्होंने एक और विवाह किया और अब वे म्युनिख में रहती हैं। युद्ध के बाद उन्होंने अपने मालिक के बारे में और हॉलोकास्ट के बारे में जाना। वे कहती हैं कि उसने ऐसे भयानक आदेश दिए होंगे, मुझे तो इस पर विश्वास ही नहीं होता। अभी भी मुझे उसके जीवन के उन पहलुओं की याद आती है जो कि मेरे लिए आकर्षक रहे हैं।



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