मूत्र से पेयजल बनाने में नासा को समस्या

ह्यूस्टन (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित शनिवार, 22 नवंबर 2008 (19:24 IST)
पर रह रहे वैज्ञानिकों के को शुद्ध कर उसे बनाने वाली नासा की प्रणाली में समस्या आ रही है। करीब 25 लाख डॉलर की यह प्रणाली इसी हफ्ते में वहाँ भेजी गई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शुक्रवार को कहा कि यह समस्या अप्रत्याशित नहीं है।

के पृथ्वी पर वापसी से पहले यह समस्या दूर कर ली जाएगी, क्योंकि मूत्र से बने पेयजल का नमूना आगे के परीक्षण के लिए एंडेवर से ही पृथ्वी भेजा जाना है। पहले से इकट्ठा किए गए मूत्र की शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू करने के बाद शुरुआती कोशिशों में ही प्रणाली को गुरुवार और शुक्रवार को बंद करना पड़ा।

यह प्रणाली यात्रियों के मूत्र तथा अन्य बेकार पानी को शुद्ध करेगी, जिसे अंतरिक्ष यात्री पेयजल के लिए इस्तेमाल करेंगे। पेयजल की समस्या दूर होने के बाद अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिकों की संख्या अगले वर्ष मई तक दोगुनी कर छह की जा सकेगी।

अंतरिक्ष स्टेशन के कमांडर माइक फिंक ने कहा मुझे पहले से ही पता था कि इस प्रणाली में कुछ समस्या आएगी। आप पृथ्वी पर चाहे जितने भी परीक्षण कर लें, अंतरिक्ष में उसका परीक्षण आपको करना ही होगा और इसमें समस्या आना स्वाभाविक है।
फिंक ने कहा हमें पूरी उम्मीद है कि हम एंडेवर के यहाँ रहते इस अभियान के दौरान ही पहले दौर का नमूना तैयार कर लेंगे। नासा को अंतरिक्ष यात्रियों की संख्या बढ़ाने से पहले इस प्रणाली को कम से कम 90 दिनों तक सुचारु रूप से संचालित करना जरूरी होगा।

एंडेवर रविवार को स्टेशन पहुँचा है और उसे गुरुवार को वापस आना है। एंडेवर को स्टेशन से शुद्ध मूत्र के नमूने पृथ्वी पर लाना है। इसके बाद उसका विश्लेषण होना है। यदि जरूरत हुई तो एंडेवर को कुछ दिन और स्टेशन पर ही रोका जा सकता है।
एंडेवर के कमांडर क्रिस फर्गुसन ने कहा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता पानी का नमूना पृथ्वी पर ले जाना है। भले ही इसके लिए हमें यहाँ कुछ दिन और रुकना पड़ जाए।



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