गर्भावस्था में उचित आहार

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गर्भावस्था के दौरान को लेकर हमारे देश में कई भ्रांतियाँ हैं। कहा जाता है कि फलाँ चीज मत खाना, नहीं तो बच्चे का रंग काला हो जाएगा। अनेक तरह के फल और सब्जियाँ गर्भवती महिलाओं के आहार में शामिल ही नहीं किए जाते। अकसर केले इसलिए नहीं खाने दिए जाते क्योंकि माना जाता है कि इससे गर्भस्थ शिशु को जन्म लेने के बाद सर्दी-जुकाम रहेगा। मछली खाने से रोका जाता है क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु को सफेद दाग होने की आशंका जताई जाती है।

उम्मीद के दिनों में आहा
गर्भवती महिलाओं को आहार की जरूरत होती है। उनके आहार में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल शामिल होने चाहिए। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में आयरन, की एक गोली रोज लेनी जरूरी है। इसकी कमी से नवजात शिशु में कटे तालू और कटे होंठों की समस्या पैदा हो जाती है। दाल, चावल, सब्जियाँ, रोटी और फलों को रोज के आहार में शामिल करें।

सुबह-शाम दूध पीना न भूलें। गर्भस्थ शिशु का शरीर जब बढ़ रहा होता है तब वह अपनी सभी जरूरतें माता के शरीर से पूरी करता है। फोलिक एसिड को फोलेट भी कहते हैं। यह कई तरह के आहार में विटामिन बी के रूप में विद्यमान होता है। चूँकि आहार से गर्भवती महिला की लौह तत्वों की आपूर्ति नहीं हो पाती इसलिए आयरन, फोलिक एसिड की गोलियाँ खानी जरूरी होती हैं।

क्या करें
गर्भवती महिलाओं को गहरे हरे रंग की सब्जियाँ जरूर खानी चाहिए। दलिया या मोटे आटे से बनी रोटियाँ भी अपने आहार में शामिल करनी चाहिए। मैदे का उपयोग कम से कम करें। संतरे, अंगूर और केले को रोज की खुराक में शामिल करें। सभी तरह की दालें, बींस, दूध और दही रोज के आहार में होने चाहिए। सूखे मेवे विटामिन और खनिजों के भरपूर स्रोत होते हैं। गर्भवती महिलाओं को कॉफी, चाय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की मात्रा में कमी करनी चाहिए। कोला पेय में कैफीन की मात्रा अधिक होती है।

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कितनी चाहिए कैलोरी
सामान्य महिला को जहाँ रोजाना 2100 कैलोरी चाहिए, वहीं गर्भवती महिला को 2500 कैलोरी की जरूरत होती है। स्तनपान कराने वाली महिला को 3000 कैलोरी प्रतिदिन चाहिए। 10 प्रतिशत कैलोरी प्रोटीन से तथा 35 प्रतिशत कैलोरी वसा यानी तेल, घी और मक्खन से तथा 55 प्रतिशत कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से आनी चाहिए।

वजन की चिंता न करें
गर्भवती महिला को वजन बढ़ने की चिंता नहीं करनी चाहिए। यही वजह है कि कई स्त्री-रोग विशेषज्ञ पहली विजिट के बाद गर्भवती महिला का वजन लेना बंद कर देती हैं क्योंकि इससे आगे के निदान पर कोई फर्क नहीं पड़ता। जाहिर है कि गर्भवती महिला का वजन उसके सामान्य वजन से अधिक ही होगा। ऐसे में चिंता की कोई जरूरत नहीं है।

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डॉ. ैफाली ओझा
महिलाएँ डिलीवरी के चंद महीनों बाद नियमित कसरत और रखरखाव से सामान्य वजन पर लौट सकती हैं। इस दौरान उन्हें खाने-पीने का पूरा ध्यान रखना चाहिए।



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