सुरीला करियर संगीत का

संगीत की धुनों के आधार पर थीम को समझकर गीतकार गीतों की रचना करता है। उसे भी गाने की थीम के साथ-साथ दर्शकों की पसंद का पता होना चाहिए। संगीत के क्षेत्र में जिंगल एक नया क्षेत्र है, जिसका प्रयोग आमतौर पर विज्ञापनों में किया जाता है। इसके लिए हाजिर जवाबी जैसा दिमाग होना चाहिए। जिंगल बनाने वाले टीवी/रेडियो विज्ञापन के माध्यम से लाखों रुपए कमा सकते हैं। हाल ही में एक जिंगल बनाने वाले ने राकेश रोशन की फिल्म के्रजी 4 में अपने जिंगल के इस्तेमाल करने पर 2 करोड़ रुपए वसूल किए थे। इससे पता चलता है कि ये कितने प्रभावी होते हैं।


कम्पोजर/गीतकार फिल्म/टीवी/रेडियो जिंगल, लोक गीतों तथा एलबम के लिए संगीत प्रतिभा का प्रयोग कर सकते हैं। जिन संगीतकारों की इस क्षेत्र में दिलचस्पी है, उन्हें कॉपीराइट, नेट वर्किंग, पब्लिशिंग ,कांट्रेक्ट तथा पराफार्मिंग राइट्स जैसे पहलुओं का ज्ञान होना चाहिए, ताकि कोई धोखाधड़ी न कर सके। म्यूजिक कम्पोजन अक्सर विज्ञापन फर्मों, प्रॉडक्शन हाउसेस, रेकार्डिंग कंपनियों, म्यूजिक पब्लिशिंग फर्मों, फिल्म, टीवी तथा रेडियो के लिए काम करते हैं।
गायक /परफार्म

परफार्मिंग आर्टिस्ट या तो अकेले काम करते हैं या फिर किसी म्यूजिक ग्रुप से जुड़े होते हैं। वे शास्त्रीय संगीत के गायक हो सकते हैं या पॉप आर्टिस्ट हो सकते हैं या वाद्य यंत्र बजाने वाले हो सकते हैं। परफार्मेंस का करियर बहुत ही अलग, लेकिन व्यापक होता है। यह आमतौर पर बजाने वाले वाद्ययंत्रों या परफार्मेंस मीडियम पर निर्भर करता है।

सभी क्षेत्रों में परफार्म करने के लिए उच्च स्तरीय संगीत तथा तकनीकी कौशल का होना आवश्यक माना जाता है। वे कांसर्ट हॉल, छोटे या बड़े कार्यक्रमों में चुनौतीपूर्ण परफार्मेंस दिखा सकते हैं। स्टूडियो में रिकार्डिंग आर्टिस्ट की भूमिका निभा सकते है या लाउंज सेटिंग्स, पब्स और नाइट क्लबों में लाइव शो कर सकते हैं। वे फिल्मों में पार्श्व गायन भी कर सकते हैं।
प्रोड्यूसर्स
प्रोड्यूसर्स रिकार्डिंग के विभिन्न तत्वों को साथ में एकत्र करते हैं तथा उन्हें इसे एक आर्टिस्टिक रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे स्टूडियो बुक करते हैं। संगीतकारों तथा इंजीनियरों को अनुबंधित करते हैं तथा रिकॉर्ड किए गए संगीत का निर्माण तथा रिकार्डिंग के बजट पर नियंत्रण रखते हैं। सफल प्रोड्यूसर बनने के लिए तकनीकी ज्ञान तथा चतुराई का होना निहायत जरूरी है। कभी-कभी पुराने आर्टिस्ट या साउण्ड इंजीनियर भी इस क्षेत्र में प्रवेश कर लेते हैं।
आर्टिस्ट/म्यूजिक मैनेजमेंट
संगीत के क्षेत्र में यह एक उभरता हुआ क्षेत्र माना गया है। आर्टिस्ट मैनेजमेंट किसी आर्टिस्ट करियर का प्लानिंग, ऑर्गनाइजिंग तथा निगोशिएटिंग से मिलकर बनता है। ये संगीत के व्यवसाय से जुड़े होते हैं तथा सख्त, अप्रिय लोगों से निपटते हैं। इनके काम में रेडियो तथा टीवी निर्माताओं के साथ मीटिंग करना तथा उनके आर्टिस्टों के लिए एयर टाइम प्राप्त करना, रिकार्डिंग कंपनियों से चर्चा करना और प्रोग्राम स्पांसर्स से बातचीत करना शामिल है।
इसके लिए संगीत और मीडिया उद्योग का ज्ञान तथा उनकी मौजूदा स्थिति का आकलन करने की क्षमता का होना आवश्यक है। संगीत में प्रशिक्षण तथा अनुभव के साथ-साथ व्यवसाय की पृष्ठभूमि से इस क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। वे किसी आर्टिस्ट विशेष या बैण्ड या म्यूजिक ग्रुप के लिए काम कर सकते हैं। साथ ही आर्टिस्ट मैनेजमेंट फर्मों, परफार्मिंग ऑर्गनाइजेशन, टूरिंग म्यूजिक एजुकेटर/ शिक्षक संगीत की शिक्षा देने वालों के लिए इस कला में निष्णात होना बेहद जरूरी है, क्योंकि जब तक आप इस क्षेत्र के उस्ताद नही होंगे दूसरों को किस तरह प्रशिक्षित कर पाएँगे।
शिक्षक चाहें तो संगीत विद्यालय खोलकर संगीत की शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा संस्थागत सेटअप्स में संगीत शिक्षकों की अच्छी माँग है। इनका मुख्य कार्य संगीत के प्रति रुचि जगाना तथा छात्रों को इस कला में माहिर बनाना है।

स्त्रोत : नईदुनिया अवसर



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