2009 : धार्मिक कट्टरता का नया रूप

- वेबदुनिया डेस्क

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दूसरी ओर अक्टूबर में उन्हें वैश्विक शांति एवं मेलमिलाप में अंतरसंस्कृति संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए 'कल्चर इन बैलेंस अवार्ड 2009’ प्रदान किया गया। फोरम टिबेरिया द्वारा स्थापित यह पुरस्कार ड्रेस्डन (जर्मन) की मेयर हेल्मा ओरोज ने रविशंकर को प्रदान किया। दिसम्बर में आयोजित मेलबोर्न (आस्ट्रेलिया) में विश्व सम्मेलन में श्रीश्री ने भाषण दिया। कुल मिलाकर अंत का यह आधा वर्ष उनके लिए योरप दौरों का ही रहा। इसके पूर्व उन्होंने जेल में ध्यान शिविरों का आयोजन किया, माओवादियों से वार्ता की इच्छा जाहिर की, जैसी अनेक गतिविधियों में वे सक्रिय रहे।

इस वर्ष ने एक कदम आगे बढ़ाया। उन्होंने योग के अलावा अब आयुर्वेद के माध्यम से स्वस्थ रहने के प्रचार को जोर-शोर से प्रचारित किया। देश में फैलती स्वाइन फ्लू की खतरनाक बीमारी से निपटने के लिए उन्होंने योग और आयुर्वेद उपचार बताते हुए कहा कि कपालभाति क्रिया और तुलसी के नियमित सेवन से इस रोग से बचा जा सकता है।

दूसरी और उन्हें 'बिग बॉस' में रहने का ऑफर भी आया था, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। सुनने में आया था कि ऐसा उन्होंने सेलिना जेटली के कार्यक्रम में शामिल होने की खबर के कारण किया। इससे पूर्व उन्होंने समलैंगिंक संबंधों को कानूनी मान्यता दिए जाने के खिलाफ भी आवाज उठाई, जबकि सेनिला ने पक्ष में, तो दोनों में ही इस बात को लेकर टकराव हो गया था।
उन्होंने भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना भी की, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिए कार्य करना है। आदिगुरु शंकराचार्य के सिद्धांत 'ब्रह्म सत्यं, जगत मिथ्या' से असहमत होने के बाबा रामदेव के कथित वक्तव्य पर संत समाज जब नाराज हुआ तो उन्हें माफी भी माँगना पड़ी थी। कुल मिलाकर इस वर्ष वे ज्यादा विवादों में नहीं रहे।

धार्मिक चैनल का धर्म : धर्म के व्यावसायिकरण के दौर में टीवी चैनलों पर अब नए-नए प्रवचनकार, माला, अँगूठी, स्फटिक और ज्योतिष तथा वास्तु के सामान बेचने वालों की बाड़-सी आ गई है। फिल्मी गानों की तर्ज पर धार्मिक गानों के नए अलबम अब हर कोई बनाने लगा है। आस्था की जगह अब ऊब होने लगी है या कहें कि इस वर्ष धर्म चैनल के माध्यम से संदेह और भ्रम का विस्तार ही ज्यादा हुआ है।
अन्य धार्मिक गतिविधि : एक संपादक ने रामचरित मानस में 3000 व्याकरणिक और भाषाई गड़बड़ियाँ निकालकर अयोध्या के संतो को भड़का दिया। संपादक सहित रामचरितमानस के इस सुधरे हुए संस्करण को तैयार करने में तुलसी पीठ, चित्रकूट के जगद्गुरू रामनंदाचार्य स्वामी राम भद्रछाया को 8 साल की गहन रिसर्च करनी पड़ी।

दूसरी और सिख समाज के दसवें गुरु के दुर्लभ पलंग को जोधपुर के गुरुद्वारा साहिब से नांदेड़ (महाराष्ट्र) साहिब तक की यात्रा करके इंदौर के स्थानीय गुरुद्वारा इमली साहिब में लाया गया। इस पलंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी पड़ी। हाँ, इस बार जून में आयोजित अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। उधर वैष्णोदेवी की यात्रा में भी खासा उत्साह रहा।
इसके अलावा जैन और बौद्ध मंदिरों में चोरी की वारदात भी पिछले वर्ष जैसी ही रही। खुशी की बात भी रही कि उत्तरप्रदेश के कुशीनगर स्थित बौद्ध मंदिर से चोरी गई 22 करोड़ रुपए की बुद्ध प्रतिमा को सुल्तानपुर के पीपरपुर इलाके से बरामद कर लिया गया। लेकिन इंदौर के गोयल नगर क्षेत्र स्थित जैन मंदिर में सशस्त्र डकैतों ने धावा बोलकर भगवान की प्रतिमा पर चढ़ाए गए लाखों रुपए मूल्य के चाँदी के जेवरात उड़ा लिए थे, उनका अभी तक पता नहीं चला है।
अंतत: त्योहारों की बात। इस वर्ष वैश्विक आर्थिक मंदि के चलते त्योहारों के प्रति कोई खास उत्साह देखने को नहीं मिला। नवरात्रि के गरबा उत्सव की जरूर धूम रही, लेकिन दीपावली के धमाकों की आवाज जोरदार नहीं रही। ईद और बकरीद पर भी महौल उतना उत्साहपूर्ण नहीं दिखा। हाँ, प्रकाश पर्व जरूर उत्साहपूर्ण नजर आया। नवंबर में साँची में बौद्ध उत्सव का आयोजन भी ज्यादा चर्चा में नहीं ही रहा। दूसरी और बालाजी के मंदिर, अजमेर की दरगाह और शिरडी की समाधि पर लोगों की भीड़ में इजाफा जरूर हुआ। क्रिसमस पर इस बार गोवा में ही उत्सवी माहौल देखने को मिला।
2008 में हावी रही धार्मिक कट्टरता



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