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shiva aarti
Written By
WD Feature Desk
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सूर्य-राहु युति कुंभ राशि में: 1 महीने तक रहेगा ग्रहण योग, इन 3 उपायों से बचेंगी परेशानियां
surya aur rahu ki yuti ke upay: 13 फरवरी 2026 को सूर्य ने कुंभ राशि में प्रवेश करके राहु के साथ युति बनाई है जिसे ग्रहण योग कहा जा रहा है। यह ग्रहण योग 13 फरवरी से लेकर 15 मार्च तक रहेगा। इसी दौरान महाशिवरात्रि और होली का पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान यदि आप मात्र 3 उपाय करते हैं तो इस अशुभ योग का राशिफल में ग्रह गोचर कुछ भी हो आपकी राशि पर प्रभाव नहीं होगा।
Lakshmi Narayan Yoga: कुंभ राशि में बना लक्ष्मी नारायण योग, इन 5 राशियों को अचानक मिलेगा धन लाभ
Lakshmi Narayan Yoga: कुंभ राशि में सूर्य के साथ बुध की युति से बुधादित्य योग, बुध की शुक्र के साथ युति से लक्ष्मी नारायण योग बना है। यह योग यह सुख-सुविधाओं और व्यापारिक बुद्धि को बढ़ाता है। कुंभ राशि शनि की राशि है, जहाँ शुक्र और बुध दोनों ही शनि के मित्र होने के कारण बहुत सहज और शक्तिशाली महसूस करते हैं। आइए जानते हैं किन राशियों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा।
कुंभ राशि में 18 साल बाद राहु का दुर्लभ संयोग, 10 भविष्यवाणियां जो बदल देंगी जीवन
18 वर्षों बाद कुंभ राशि में राहु का शक्तिशाली योग बन रहा है। जानिए 10 बड़ी भविष्यवाणियां और यह संयोग आपके जीवन में क्या बदलाव लाएगा। 18 इस दुर्लभ ज्योतिषीय घटना का प्रभाव राजनीति से लेकर आम लोगों के जीवन तक साफ दिखाई देगा।
शुक्र का राहु के शतभिषा नक्षत्र में गोचर, 5 राशियों को रहना होगा सतर्क
शुक्र का राहु के नक्षत्र 'शतभिषा' में प्रवेश करना एक अत्यंत प्रभावशाली घटना है। जहां यह कुछ राशियों के लिए धन के द्वार खोलता है, वहीं राहु के नक्षत्र में होने के कारण यह शुक्र की सौम्यता को थोड़ा अस्थिर या भ्रामक भी बना सकता है। जिन राशियों को इस गोचर के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, वे निम्नलिखित हैं।
कुंभ राशि में त्रिग्रही योग, 4 राशियों को मिलेगा बड़ा लाभ
कुंभ राशि में बुध, शुक्र और राहु की युति से बनने वाला यह त्रिग्रही योग बौद्धिक चातुर्य, विलासिता और अचानक मिलने वाले लाभ का एक अनूठा संगम है। राहु यहाँ 'धुंए' की तरह है जो बुध (बुद्धि) और शुक्र (सुख) के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। वर्तमान में कुंभ राशि में बन रहा यह योग मुख्य रूप से इन राशियों के लिए 'लॉटरी' के समान परिणाम ला सकता है।
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Rang Panchami 2026: रंगपंचमी का त्योहार कब मनाया जाएगा, क्या है इसका महत्व और कथा
Significance of Colors in Indian Festivals: भारतभर में चैत्र कृष्ण पंचमी के दिन रंगपंचमी के दिन को मनाते हुए, न केवल रंगों के खेल का आनंद लेते हैं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और सजीवता का संदेश फैलाते हैं। रंगपंचमी के साथ जुड़ी धार्मिक कथाएं, कृष्ण और राधा की प्रेम कहानी और होली के बाद इसे मनाने की परंपरा इसे एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व बनाती हैं।
Holashtak 2026: 24 फरवरी से प्रारंभ होंगे 'होलाष्टक', शुभ कार्य रहेंगे वर्जित
Holashtak from 24 February: शास्त्रीय मार्गदर्शन अनुसार इस वर्ष होलिका-दहन दिनांक 02 मार्च 2026 को रात्रि 11 बजे से 12:30 के मध्य किया जाएगा क्योंकि इस अवधि में भद्रा के मुख की पांच घटियां अर्थात् 02 घण्टे व्यतीत हो चुके होंगे जो कि भद्रा का शास्त्रसम्मत परिहार है,
Dhulendi in 2026: रंगों वाली होली का पर्व 3 को मनाएं या कि 4 मार्च को जानिए सही तारीख
When is Dhulendi in 2026: परंपरा के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात को होलिका का दहन होता है और दूसरे दिन प्रतिपदा के दिन धुलंडी का पर्व मनाया जाता है। इस बार होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया भी है। ऐसे में कब मनाएं रंगवाली होली यानी धुलेंडी? चलिए जानते हैं।
शबरी माता कौन थीं, जिसने खिलाएं थे प्रभु श्रीराम को जूठे बेर
Who was Shabari Mata: देवी शबरी एक आदिवासी महिला थीं, जो जंगलों में रहती थीं। उनका नाम शबरी था, और वे एक साधारण, गरीब, और वनवासी परिवार से थीं। वह केवल श्रीराम के लिए अपने जीवन को समर्पित करना चाहती थीं।
होलाष्टक के 8 दिन क्यों माने जाते हैं अशुभ? जानें 12 राशियों पर क्या पड़ेगा असर
Effect of Holashtak on 12 Zodiac Signs: होलाष्टक के 8 दिन क्यों अशुभ माने जाते हैं और इस दौरान शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते? जानें धार्मिक कारण और 12 राशियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।