dharma sangrah

84 महादेव : श्री दुर्दुरेश्वर महादेव(84)

Written By WD
Updated: गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016 (12:15 IST)
अयोध्या के राजा को वन में एक कन्या मिली। वे उससे विवाह कर उसे राज्य मे ले आए। उसके मोह में राजा का ध्यान राजकाज से हट गया। राजा के मंत्री ने सुंदर वाटिका निर्माण कराकर राजा को वहां उसे रानी के साथ छोड़ दिया। एक बार रानी वहां बने एक तालाब में स्नान करने गई और फिर वापस नहीं आई। उस तालाब में दुर्दुर (मेंढक) अधिक थे। राजा ने सभी मेढकों को नष्ट करने का आदेश दे दिया। इस बीच मेंढकों का राजा निकलकर आया और कहा मेरा नाम आयु है ओर जो कन्या है वह उसकी पुत्री है। उसकी कन्या को नाग लोक का राजा नागचूड़ ले गया है। आप उसे याद करें ओर उससे रानी को मांगें। नागचूड़ ने राजा को उसकी रानी सौंप दी। नागचूड़ ने कहा कि उसने गालव ऋषि का उपहास उड़ाया था इस कारण उसे दुर्दुर होने का श्राप दिया।

उन्होंने कहा जब तुम अपनी कन्या इक्श्वाकु कुल के राजा को दान करोगे और महाकाल वन के उत्तर में स्थित शिवलिंग के दर्शन करोगे तो तुम्हें मुक्ति मिलेगी। ऐसा करने के बाद वे स्वर्ग को प्राप्त हुए। दुर्दुर से मुक्ति के कारण शिवलिंग दुर्दुरेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुए। मान्यता है कि जो भी दुर्दुरेश्वर महादेव के दर्शन करेगा उसके पाप नष्ट होंगे। यह मंदिर आगर रोड़ पर जैथल गांव में है। 

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 02 सितंबर 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

10 सितंबर से यूरेनस की उल्टी चाल: 4 राशियों के लिए 8 फरवरी 2027 तक खुलेंगे तरक्की और धन के रास्ते

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की 12 अनूठी परंपराएं जो इस पर्व को बनाती हैं खास

बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी पर मंगला आरती का रहस्य एवं धार्मिक महत्व

मंगल-शनि का केंद्र योग बढ़ाएगा तनाव! 4 राशियों की किस्मत का पलट जाएगा पासा