तोंद एक वैश्विक समस्या है और इसका जन्म खान-पान और शरीर के प्रति लापरवाही से होता है। तोंद के निकल आने से व्यक्ति बहुत ही बेडोल लगता है। उसे सभी तोंदू कहते हैं और कुछ लोग तो उसे चलता-फिरता मिनी सेप्टीटैंक भी कहते हैं। अक्सर किसम-किसम के तोंदू देखे जा सकते हैं। तोंद कम करने के लिए यहाँ कुछ टिप्स दी जा रही है।
*खड़े होकर : सावधान मुद्रा में खड़े होकर कटिचक्रासन फिर त्रिकोणासन करें। *बैठकर : वज्रासन में बैठकर पहले उष्ट्रासन करें फिर दंडासन में बैठकर पश्चिमोत्तनासन करें। *लेटकर : मकरासन अर्थात पेट के बल लेटकर भुजंगासन करें फिर शवासन अर्थात पीठ के बल लेटकर हलासन करें।
*अवधि : दो माह नियमित अभ्यास।
*सावधानी : मसालेदार और अत्यधिक भोजन को त्याग दें। भोजन में सलाद का ज्यादा इस्तेमाल करें। किसी भी प्रकार का गंभीर रोग होने की स्थिति में योग प्रशिक्षक की सलाह लेकर ही आसन करें।
*इसके लाभ : तोंद घटाने के योगासन करने से तोंद तो कम होगी ही साथ ही उक्त आसन अन्य बहुत से रोगों में भी लाभदायक है। जैसे कटिचक्रासन और त्रिकोणासन कमर, पेट, कुल्हे, मेरुदंड तथा जँघाओं को सुधारता है। इससे गर्दन और कमर में लाभ मिलता है। उष्ट्रास से घुटने, ब्लडर, किडनी, छोटी आँत, लीवर, छाती, लंग्स एवं गर्दन तक का भाग एक साथ प्रभावित होता है, जिससे कि उपर्युक्त अँग समूह का व्यायाम होकर उनका निरोगीपन बना रहता है।
भुजंगासन से गला खराब रहने की, दमे की, पुरानी खाँसी अथवा फेंफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी और पाचन शक्ति में लभ मिलता है। हलासन के नियमित अभ्यास से अजीर्ण, कब्ज, अर्श, थायराइड का अल्प विकास, अँगविकार, असमय वृद्धत्व, दमा, कफ, रक्तविकार आदि दूर होते हैं। सिरदर्द दूर होता है। रीढ़ में कठोरता होना वृद्धावस्था की निशानी है। हलासन से रीढ़ लचीली बनती है।
शॉर्ट कट : भोजन को साधकर सिर्फ उष्ट्रासन और पश्चिमोत्तनास करते रहने से भी तोंद कम की जा सकती है। YOG
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें