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Year Ender 2023 : विद्यार्थियों की आत्महत्या ने बढ़ाई चिंता, प्रशासन ने उठाए एहतियाती कदम

Updated: रविवार, 31 दिसंबर 2023 (19:08 IST)
Year Ender 2023 : राजस्थान का कोटा शहर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के वास्ते कोचिंग का गढ़ माना जाता है लेकिन वर्ष 2023 में पूरे देश में उस वक्त चिंता की लहर दौड़ गई जब सालभर में एक के बाद एक कुल 26 विद्यार्थियों ने विभिन्न कारणों से आत्महत्या कर ली।
 
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी रमेश कुमार (परिवर्तित नाम) के लिए वर्ष बेहद खराब रहा। उनका बड़ा बेटा पिछले दो वर्षों से कोटा में मेडिकल की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था और एक दिन उसने छात्रावास के अपने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
 
कुमार के बेटे सहित इस वर्ष कोटा में कोचिंग करने वाले कुल 26 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। यह विद्यार्थियों की आत्महत्या के सबसे अधिक आंकड़े हैं। पिछले वर्ष यह संख्या 15 थी। बेटे की मौत के गम में डूबे कुमार ने कोटा में इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए इस वर्ष की शुरुआत में वहां गए अपने छोटे बेटे को वापस बुलाने का निर्णय किया है।
 
उन्होंने कहा, वे अलग-अलग छात्रावासों में रहते थे और अलग-अलग कोचिंग संस्थान में पढ़ते थे। हमारी योजना यह थी कि 2024 में मेरी पत्नी कोटा चली जाएंगी और किराए का एक मकान लेंगी, फिर तीनों साथ में रहेंगे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि तब तक मेरा बेटा नहीं रहेगा...।
 
सालाना दो लाख से अधिक छात्र इंजीनियरिंग के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा जाते हैं। व्यस्त दिनचर्या, कड़ी प्रतिस्पर्धा, बेहतर करने का लगातार दबाव, माता-पिता की अपेक्षाओं का बोझ और घर की याद आना कुछ ऐसी परेशानियां हैं जिनका विद्यार्थी लगातार सामना करते हैं।
 
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के फरदीन हुसैन अब भी इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि उनके बेटे ने आत्मघाती कदम क्यों उठाया। रुंधे गले से हुसैन ने कहा, वह बहुत मेधावी छात्र था। मैं चाहता था कि वह डॉक्टर बने लेकिन उस पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं था। ‘टेस्ट’ में भी उसके अच्छे नंबर आते थे। मुझे समझ ही नहीं आया कि उसने यह कदम क्यों उठाया।
 
अचानक छात्रों के इस प्रकार के आत्मघाती कदम उठाने से परेशान कोटा प्रशासन और कोचिंग के क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। वर्ष 2024 में यह पता चलेगा कि ये कदम कितने कारगर साबित हुए।
 
छात्रावासों के कमरों में ऐसे पंखे लगाए गए हैं जिनसे वे फंदा नहीं बना सकें, बालकनी और लॉबी में जालियां लगवाना, मेधावी विद्यार्थियों के महिमामंडन पर रोक से लेकर नियमित परीक्षाओं के नतीजों को गोपनीय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
 
कोचिंग संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले नियमित ‘टेस्ट’ पर भी जिला प्रशासन ने दो महीने से अधिक समय तक रोक लगा दी थी। इन उपायों के साथ ही कोटा में छात्रावास के वार्ड और स्टाफ कर्मियों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। (भाषा)
Edited By : Chetan Gour 

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