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Falguni Pathak Garba: गरबा क्वीन फाल्गुनी पाठक जिनके गानों के बिना अधूरा है नवरात्रि सेलिब्रेशन, जानिए कैसे हुई थी करिअर की शुरुआत
जानिए एक शो से कितना कमाती हैं फाल्गुनी, भारत से लेकर विदेशों तक तगड़ी है फैन फॉलोइंग
Garba Queen Falguni Pathak: जिन्हें भारत में "गरबा क्वीन" के नाम से जाना जाता है, का नाम सुनते ही हर किसी के मन में गरबा नृत्य और नवरात्रि के उल्लास की तस्वीर उभर आती है। उनकी मधुर आवाज़, जीवंत संगीत और नवरात्रि के गीतों को लोग खूब पसंद करते हैं। किसी भी रास-गरबा नाइट्स और डंडिया सेलिब्रेशन में उनके गाने के बिना समारोह पूरा नहीं होता। आज इस आलेख में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे फाल्गुनी पाठक ने संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाई और गरबा को एक नई पहचान दी।
मुंबई से की पढ़ाई, 1969 में करी करियर की शुरुआत
फाल्गुनी पाठक का जन्म 12 मार्च 1969 को हुआ था। बताया जाता है कि उन्होंने मुंबई के कॉलेज से बी.कॉम किया है। वो सिंगर, परफॉर्मर आर्टिस्ट और कंपोजर भी हैं। उनका म्यूजिक गुजरात के ट्रेडिशनल म्यूजिक फॉर्म पर बेस्ड है। उन्होंने 1987 में अपने करियर की शुरुआत की थी।
फाल्गुनी पाठक का जन्म 12 मार्च 1969 को हुआ था। बताया जाता है कि उन्होंने मुंबई के कॉलेज से बी.कॉम किया है। वो सिंगर, परफॉर्मर आर्टिस्ट और कंपोजर भी हैं। उनका म्यूजिक गुजरात के ट्रेडिशनल म्यूजिक फॉर्म पर बेस्ड है। उन्होंने 1987 में अपने करियर की शुरुआत की थी।
उन्होंने बहुत ही कम उम्र में संगीत के प्रति रुचि दिखाई और विभिन्न प्रकार के भारतीय लोक गीतों और गुजराती गानों से प्रेरणा ली। बचपन से ही उनका झुकाव पारंपरिक संगीत की ओर था, और यही वजह रही कि उन्होंने नवरात्रि के गरबा संगीत में अपना करियर शुरू किया।
बचपन से ही था रेडियो सुनने का शौक, पिता के हाथ से खाई थी मार
फाल्गुनी पाठक की पर्सनल लाइफ के बारे में बात करें तो उन्होंने शादी नहीं की है। उनकी चार बहनें हैं। जानकारी के मुताबिक, बचपन में उन्हें रेडियो सुनना बहुत पसंद था और यहीं से सिंगिंग में उनकी दिलचस्पी होने लगी। महज 9 साल की उम्र में उन्होंने पहली परफॉर्मेंस दी थी। जब उनके पिता को इस बारे में पता चला तो उन्हें बहुत डांटा और मारा था।
फाल्गुनी पाठक की पर्सनल लाइफ के बारे में बात करें तो उन्होंने शादी नहीं की है। उनकी चार बहनें हैं। जानकारी के मुताबिक, बचपन में उन्हें रेडियो सुनना बहुत पसंद था और यहीं से सिंगिंग में उनकी दिलचस्पी होने लगी। महज 9 साल की उम्र में उन्होंने पहली परफॉर्मेंस दी थी। जब उनके पिता को इस बारे में पता चला तो उन्हें बहुत डांटा और मारा था।
मां ने सिखाए थे ट्रेडिशनल गुजराती गाने
गुजराती फैमिली में जन्म होने की वजह से फाल्गुनी बचपन से ही गरबा सुनते सुनते बड़ी हुई हैं। उनकी मां ने उन्हें ट्रेडिशनल गुजराती गाने सिखाए थे और बाद में फाल्गुनी ने नवरात्रि इवेंट्स में गाना शुरू किया। 1994 में उन्होंने अपना बैंड बनाया, जिसका नाम था 'ता थैया'। इस बैंड के जरिए उन्होंने कई देशों में परफॉर्म किया।
गुजराती फैमिली में जन्म होने की वजह से फाल्गुनी बचपन से ही गरबा सुनते सुनते बड़ी हुई हैं। उनकी मां ने उन्हें ट्रेडिशनल गुजराती गाने सिखाए थे और बाद में फाल्गुनी ने नवरात्रि इवेंट्स में गाना शुरू किया। 1994 में उन्होंने अपना बैंड बनाया, जिसका नाम था 'ता थैया'। इस बैंड के जरिए उन्होंने कई देशों में परफॉर्म किया।
संगीत और गरबा का संगम
फाल्गुनी का संगीत जीवन गरबा से शुरू हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने इसे एक नए स्तर पर पहुंचाया। उनकी आवाज में ऐसी मिठास है जो लोगों को गरबा करने के लिए प्रेरित करती है। उनके गानों में पारंपरिक और मॉडर्न म्यूजिक का एक अनोखा मेल दिखाई देता है, जो हर पीढ़ी को पसंद आता है। उनके प्रमुख गानों में से कुछ हैं
फाल्गुनी का संगीत जीवन गरबा से शुरू हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने इसे एक नए स्तर पर पहुंचाया। उनकी आवाज में ऐसी मिठास है जो लोगों को गरबा करने के लिए प्रेरित करती है। उनके गानों में पारंपरिक और मॉडर्न म्यूजिक का एक अनोखा मेल दिखाई देता है, जो हर पीढ़ी को पसंद आता है। उनके प्रमुख गानों में से कुछ हैं
- "मैंने पायल है छनकाई",
- "चुड़ी जो खनकी हाथों में"
- "सावन में मोरनी"
इन गानों ने न केवल युवाओं के दिलों में जगह बनाई, बल्कि नवरात्रि के त्योहार का हिस्सा भी बन गए। आज भी, उनके लाइव शो और नवरात्रि की रातों में हजारों लोग उन्हें सुनने और उनके गानों पर झूमने आते हैं।
गरबा क्वीन के नाम से मशहूर
नवरात्रि के दौरान, फाल्गुनी पाठक के कार्यक्रम देश भर में विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनके संगीत में एक अलग ही ऊर्जा होती है जो गरबा खेलने वालों को थकने नहीं देती। उनके लाइव शो की लोकप्रियता इतनी है कि मुंबई, अहमदाबाद और सूरत जैसे बड़े शहरों में उनके कार्यक्रमों की अग्रिम बुकिंग महीनों पहले ही हो जाती है।
नवरात्रि के दौरान, फाल्गुनी पाठक के कार्यक्रम देश भर में विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनके संगीत में एक अलग ही ऊर्जा होती है जो गरबा खेलने वालों को थकने नहीं देती। उनके लाइव शो की लोकप्रियता इतनी है कि मुंबई, अहमदाबाद और सूरत जैसे बड़े शहरों में उनके कार्यक्रमों की अग्रिम बुकिंग महीनों पहले ही हो जाती है।
एक शो से कमाती हैं लाखों रुपये, इन चीज़ों का है शौक
जानकारी के मुताबिक साल अगस्त 2013 में उन्होंने नवरात्रि फेस्टिवल से 2 करोड़ रुपये कमाए थे। उन्हें एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के लिए गाने और परफॉर्म करने के लिए हर दिन के 70 लाख रुपये ऑफर किए गए थे।
बताया जाता है कि वो एक शो के लिए 20 से 25 लाख रुपये फीस लेती हैं। उनके पास मर्सिडीज बेन्ज जैसी महंगी कार है। वो मुंबई में ही रहती हैं। वो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं।
फाल्गुनी क्यों रहती हैं टॉम ब्वॉय के लुक में?
कई लोग के मन में ये सवाल आता होगा कि फाल्गुनी पाठक टॉम ब्वॉय जैसे क्यों रहती हैं! बताया जाता है कि चार बेटियों के बाद उनके पैरेंट्स को उम्मीद की थी कि पांचवा बच्चा बेटा ही होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए फाल्गुनी बचपन से ही लड़कों जैसे रहने लगीं। लड़कों की तरह ही कपड़े पहनने लगीं और वे आज भी ऐसे ही रहती हैं।
कई लोग के मन में ये सवाल आता होगा कि फाल्गुनी पाठक टॉम ब्वॉय जैसे क्यों रहती हैं! बताया जाता है कि चार बेटियों के बाद उनके पैरेंट्स को उम्मीद की थी कि पांचवा बच्चा बेटा ही होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए फाल्गुनी बचपन से ही लड़कों जैसे रहने लगीं। लड़कों की तरह ही कपड़े पहनने लगीं और वे आज भी ऐसे ही रहती हैं।
