हिन्दी के बारे में महापुरुषों के कथन

WD| Last Updated: शुक्रवार, 12 सितम्बर 2014 (17:03 IST)


'प्रान्तीय ईर्ष्या-द्वेष को दूर करने में जितनी सहायता इस हिन्दी प्रचार से मिलेगी,उतनी दूसरी किसी चीज से नहीं मिल सकती। अपनी प्रान्तीय भाषाओं की भरपूर उन्नति कीजिए,उसमें कोई बाधा नहीं डालना चाहता और न हम किसी की बाधा को सहन ही कर सकते हैं। पर सारे प्रान्तों की सार्वजनिक भाषा का पद हिन्दी या हिन्दुस्तानी को ही मिला है।'

-सुभाषचन्द्र बो

- हिन्दी के विरोध का कोई भी आन्दोलन राष्ट्र की प्रगति में बाधक है।

-सुभाष चन्द्र बोस




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