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कौन-सी दिशा सबसे अच्छी होती है और क्यों, जानिए

गुरुवार,अप्रैल 8, 2021
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समय के साथ लाइफस्टाइल में भी काफी बदलाव आ रहे हैं। कई लोग नेचर में सुकून ढूंढते हैं इसके लिए लोग घरों में पेड़ पौधें लगाने लगे हैं। इन दिनों बोनसाई के पेड़ काफी टेंडिंग में चल रहे हैं।
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सूर्योदय से पहले रात्रि 3 से सुबह 6 बजे का समय ब्रह्म मुहूर्त होता है। इस समय सूर्य घर के उत्तर-पूर्वी भाग में होता है। यह समय चिंतन-मनन व अध्ययन के लिए बेहतर होता है।
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पारिजात के पेड़ को हरसिंगार का पेड़ भी कहा जाता है। इसमें बहुत ही सुंदर और सुगंधित फूल उगते हैं। यह सारे भारत में पैदा होता है। इसे संस्कृत में पारिजात, शेफालिका। हिन्दी में हरसिंगार, परजा, पारिजात। मराठी में पारिजातक। गुजराती में हरशणगार। बंगाली ...
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वास्तु शास्त्र में कई तरह के वेध बताए गए हैं। जैसे, स्तंभवेध, वृक्षवेध आदि। उन्हीं में से एक है छायावेध। छायावेध अर्थात घर पर पड़ने वाली छाया से किसी प्रकार का वास्तुदोष निर्मित होना। यह छाया अच्छी भी हो सकती है और बुरी भी। ज्योतिष में छाया को राहु ...
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दिशाएं दस होती हैं। दिशाओं की शुरुआत ऊर्ध्व व ईशान से होती है और उत्तर-अधो पर समाप्त। 1. ऊर्ध्व 2. ईशान, 3. पूर्व, 4. आग्नेय, 5. दक्षिण, 6. नैऋत्य, 7. पश्चिम, 8. वायव्य, 9. उत्तर और 10. अधो। दिशा में जहां दिशा शूल होता है, वहीं राहु काल भी ...
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जब हम गृह प्रवेश करते हैं तो नई आशा, नए सपने, नई उमंग स्वाभाविक रूप से मन में हिलोर लेती है। आइए जानें 20 जरूरी बातें जो आपको नए घर में प्रवेश के समय याद रखनी चाहिए।
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वास्तु शास्त्र में जल का सर्वाधिक शुभ स्थान ईशान कोण को ही माना गया है। इसीलिए घर में पानी सही स्थान पर और सही दिशा में रखने से
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घर में दरवाजे और खिड़खियों में पर्दे लगाते हैं। कई बार हम वास्तु के अनुसार नहीं बल्कि सुंदर पर्दे देखकर ही पर्दे लगा लेते हैं फिर भले ही वह ब्लैक एंड वाइट में डिजाइन वाले पर्दे ही क्यों ना हो। पर्दों का भी वास्तु शास्त्र में बहुत महत्व बताया गया है। ...
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हम जहां या जिस स्थान पर रहते हैं, उसे वास्तु कहते हैं। अगर हमारे घर या फ्लैट में वास्तु दोष हो तो हमें दुःख और तकलीफों का सामना करना पड़ता है। घर में नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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रसोईघर अर्थात किचन को वास्तु अनुसार बनाना जरूरी है अन्यथा यह रोग, शोक और धन की बर्बादी का कारण बन सकता है। किचन पूर्व या आग्नेय कोण में है तो बहुत ही अच्छा है। आओ जानते हैं कि वास्तु के अनुसा किचन का किचन स्टैंड, या प्लेटफार्म कैसा होना चाहिए।
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बैठक रूम में कभी भी नकारात्मक चित्र न लगाएं, जैसे ताजमहल, महाभारत या किसी कांटेदार पौधे का चित्र। जंगली जानवर, रोते हुए बच्चे, नंगे बच्चे, युद्ध के दृश्य, भगवान व पेड़ आदि के चित्र भी न लगाएं। यदि घर में फव्वारा या झरने का चित्र लगा रखा है तो सावधान, ...
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धन-समृद्धि के लिए बैठक में गोल्डन फ्रेम में पति-पत्नी की प्यारी-सी फोटो लगाएं।
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रंगों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। वैज्ञानिकों के अनुसार रंग तो मूलत: पांच ही होते हैं- कला, सफेद, लाल, नीला और पीला। काले और सफेद को रंग मानना हमारी मजबूरी है जबकि यह कोई रंग नहीं है। इस तरह तीन ही प्रमुख रंग बच जाते हैं- लाल, पीला और नीला। ...
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कपड़े रखने, किताबें रखने या अन्य छोटा-मोटा सामान रखने वाली अलमारियों को बंद करने का दरवाजा नहीं है या उनमें कांच नहीं लगा है तो वह खुली मानी जाएगी। इसी तरह यदि वे कहीं से भू टूटी या खराब है तो इससे 2 तरह के नुकसान होंगे।
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प्रत्येक ग्रह का एक प्रतिनिधि पेड़, पौधा या वृक्ष होता है। जैसे गुरु का पेड़ पीपल है, सूर्य के तेजफल का वृक्ष, चंद्र का पोस्त का पौधा या दूध वाले वृक्ष, मंगल नेक के लिए नीम और मंगल बद के लिए ढाक, बुध के लिए केला या चौड़े पत्ते वाले वृक्ष, शुक्र के ...
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वास्तु दोष कई प्रकार से होता है। वास्तु के अनुसार घर का उचित जगह पर होना भी जरूरी है। वास्तु शास्त्र में कुछ जगहों पर एक सभ्य व्यक्ति को नहीं रहना चाहिए। यदि वह वहां रहता है तो निश्‍चित ही उसके जीवन और भविष्‍य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। घर यदि ...
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घर का दरवाजा ही हमारी सुख, समृद्धि और शांति के द्वार खोलता है। यह टूटा फूटा, एक पल्ले वाला, त्रिकोणाकार, गोलाकार, वर्गाकार या बहुभुज की आकृति वाला, दरवाजे के भीतर वाला दरवाजा, खिड़कियों वाला दरवाजा आदि नहीं होना चाहिए। इसकी देहली के साथ ही इसकी ऊपर ...
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हमारे घर में रखी वस्तुएं हमारे जीवन पर, सेहत पर और मानसिक स्थिति पर बहुत गहरा असर डालती है। वास्तु अनुसार घर में कई तरह की नकारात्मक वस्तुएं होती है जिसका हमें पता ही चलता है। ऐसी वस्तुओं को घर से बाहर निकाल देना चाहिए या उन्हें उचित स्थान पर रखना ...
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भवन बनाते समय दरवाजे, खिड़की और अन्य जगहों पर लकड़ी का प्रयोग होता है। भवन बन जाने के बाद आप उसमें लकड़ी वाले फर्नीचर भी खरीदकर रखते हैं। आओ जानते हैं कि वास्तु के अनुसार ही लकड़ी का चुनाव करना क्यों जरूरी है।
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