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ईवी बाजार में यूपी की 19 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी

मुख्‍यमंत्री योगी ने कहा- उभरती प्रौद्योगिकियों में यूपी को अग्रणी बनाने का संकल्प, एआई, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सेक्टर में बड़े बजट का प्रावधान

Updated: मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 (16:09 IST)
Electric Vehicle Market: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सोमवार को विधान परिषद में कहा कि सरकार ने उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। यही वजह है कि पूरे देश में बिक रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल में प्रदेश की भागीदारी 19 प्रतिशत पहुंच चुकी है। सरकार ने एआई,  डिजिटल टेक्नोलॉजी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, सेमी कंडक्टर और डाटा साइंस जैसे सेक्टर में तेजी से कार्य करते हुए इसे विकास की मुख्य धारा से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में कोविड कालखंड के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति दी जिसने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी। प्रदेश सरकार ने भी इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है।

आज डाटा सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्तमान बजट में इमरजिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े सभी क्षेत्रों में विशेष प्रावधान किए हैं। आज के समय में डाटा सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए बजट में स्टेट डाटा अथॉरिटी के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही डाटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना के लिए भी व्यवस्था की गई है, क्योंकि एआई और डिजिटल सेक्टर में प्रगति के लिए मजबूत डाटा इन्फ्रास्ट्रक्चर अनिवार्य है। 
 
उन्होंने बताया कि एआई आज देश का एक महत्वपूर्ण इमर्जिंग सेक्टर बन चुका है। प्रदेश सरकार ने एआई और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए वोकेशनल एजुकेशन, टेक्नोलॉजी एजुकेशन तथा माध्यमिक शिक्षा स्तर पर भी विशेष बजट का प्रावधान किया है, ताकि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही आधुनिक तकनीकों का ज्ञान मिल सके। इस दिशा में टाटा टेक्नोलॉजिस और सैमसंग के साथ साझेदारी कर कार्य तेज़ी से प्रारंभ किया गया है। युवाओं को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने के उद्देश्य से सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत हर वर्ष डेढ़ लाख युवा उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत युवाओं को मार्जिन मनी के साथ-साथ गारंटी मुक्त और ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। एमएसएमई और ओडीओपी जैसे कार्यक्रम भी इसी दिशा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। डिजिटल रूप से सक्षम युवा तैयार करने के लिए स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत टैबलेट वितरण योजना को भी तेज़ी से लागू किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का नौजवान तकनीकी रूप से सशक्त बन सके और आधुनिक अवसरों का लाभ उठा सके।

बेरोजगारी दर में गिरावट

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ने नौ वर्षों में पर्यटन, हॉस्पिटिलिटी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। प्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों तक सीमित न रहकर नई तकनीकों और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश ऑटोमेशन और डाटा आधारित निर्णय प्रणाली को अपनाते हुए एआई रोबोटिक्स, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में एक साथ प्रगति कर रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
 
हाल ही में लखनऊ में प्रदेश की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना हुई है। इसके साथ ही राज्य में इस क्षेत्र से जुड़े कई नए निवेश प्रस्ताव भी लगातार आ रहे हैं। आज देश में जितने भी इलेक्ट्रिक व्हीकल देश में खरीदे जा रहे हैं, उनमें से 19 फीसदी से अधिक हिस्सा यूपी का है। वहीं, तिपहिया वाहनों में 40 फीसदी से अधिक भागीदारी है।  फेम-1 और फेम-2 के प्रमुख लाभार्थी यूपी के हैं। एक्सप्रेस कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशन की स्थापना और 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन यूपी में हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बदलती पहचान का एक महत्वपूर्ण आधार युवा शक्ति है।
 
स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश का युवा तेजी के साथ अपनी एक नई धमक और पहचान बना रहा है। आज प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न हैं, आज प्रदेश के युवा नेतृत्व और इनोवेशन की ताकत को न केवल प्रदेश बल्कि पूरा देश देख रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब युवा स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ता है और आत्मनिर्भर बनता है, तो बेरोजगारी की दर अपने आप कम हो जाती है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से अधिक थी, जो अब घटकर 2.24 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 

खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास तेजी के साथ हुआ है। हर गांव में खेल का मैदान, हर ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, हर जनपद में स्टेडियम का निर्माण तेजी से हो रहा है। मेजर ध्यानचंद के नाम पर मेरठ में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी तैयार है। इस बार बजट में हर डिवीजनल हेडक्वार्टर पर एक स्पोर्ट्स कॉलेज बनेगा जिसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने के लिए प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ में मेडल प्राप्त करने वाले 500 से अधिक खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी है। वहीं, वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स अहमदाबाद और वर्ष 2036 के ओलंपिक के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विकसित करने की कार्यवाही को तेज कर दी गयी है। 

सपा का परिवारवादी मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी विकास की बात करती है और वर्तमान सरकार की विकास योजनाओं या बजट पर टिप्पणी करती है तो हंसी आती है। उन्होंने कहा कि जिन्हें चार-चार बार अवसर मिलने के बाद भी प्रदेश में विकास की कोई ठोस योजना आगे बढ़ाने में सफलता नहीं मिली, वे आज विकास का आईना दिखाने की बात कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी का विकास मॉडल परिवारवादी, तुष्टीकरण आधारित और दंगाइयों को पल्लवित-पोषित करने वाला था।
 
उन्होंने कहा कि देश में आपातकाल के खिलाफ शंखनाद करने वाले लोकनायक जयप्रकाश नारायण उत्तर प्रदेश की धरा पर जन्मे थे। हमारी सरकार को इस बात पर गौरव की अनुभूति होती है कि हमने जेपी की अंतिम इच्छा का सम्मान किया है। उनकी जन्मभूमि पर अस्पताल निर्माण और बेहतर कनेक्टिविटी की व्यवस्था की गई है। जेपी के नाम पर राजनीति करने वाले यह कार्य नहीं कर पाए, लेकिन हमारी सरकार ने इसे पूरा किया और मुझे दो बार उनकी जन्मभूमि पर जाने का अवसर भी मिला। जेपीएनआईसी (JPNIC) परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)200 करोड़ रुपये की बनी, लेकिन 800 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही। यह समाजवादी पार्टी के विकास मॉडल का उदाहरण है। 
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर फ्रंट परियोजना 300 करोड़ रुपये की थी, लेकिन 1400 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद अधूरी रही। समाजवादी सरकार में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना का एलाइनमेंट तय कर टेंडर अवार्ड कर दिए, जबकि भूमि अधिग्रहण नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण से पहले टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती, लेकिन यहां “अवैध तरीके” से टेंडर किए गए। उस समय परियोजना की डीपीआर बनी थी, जो 15,200 करोड़ रुपये की थी। एक्सप्रेसवे को 110 मीटर चौड़ा और 390 किलोमीटर लंबा बनाया जाना था। मार्च में सरकार बनने के बाद मई में उन्होंने इसकी प्रगति की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि प्रगति शून्य है, क्योंकि भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ था।

जेपी और लोहिया के सपनों पर कुठाराघात 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार में आने के बाद लैंड में एलाइनमेंट में थोड़ा परिवर्तन कर भूमि अधिग्रहण कराया गया। एक्सप्रेसवे को 110 मीटर के बजाय 120 मीटर चौड़ा करने का निर्णय लिया गया, ताकि भविष्य में दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए भी भूमि की व्यवस्था की जा सके। वर्ष 2019 में जब टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई तो पहले की तरह 15,200 करोड़ रुपये का ही टेंडर आया, जिससे उन्हें संदेह हुआ। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि क्या तकनीकी और वित्तीय बिड एक साथ मंगाई गई थीं। सकारात्मक उत्तर मिलने पर उन्होंने प्रक्रिया निरस्त कर अलग-अलग चरणों में बिड मंगाने के निर्देश दिए। इसके बाद पुनः टेंडर होने पर वही एक्सप्रेसवे, जो पहले 110 मीटर चौड़ाई के साथ 15,200 करोड़ रुपये में प्रस्तावित था, 120 मीटर चौड़ाई के साथ 11,800 करोड़ रुपये में स्वीकृत हुआ। समाजवादी पार्टी ने जेपी और लोहिया के सपनों पर कुठाराघात किया है। 
 
उन्होंने कहा कि जेपी और लोहिया का संकल्प संपत्ति और संतति से दूर रहने का था, लेकिन समाजवादी पार्टी ने इसके विपरीत आचरण किया। समाजवादी पार्टी का पीडीए मॉडल पारिवारिक डेवलपमेंट अथॉरिटी है। यह एक परिवार के विकास की अथॉरिटी है, जिसमें कोई चेयरमैन है, कोई सीईओ, कोई वाइस चेयरमैन और अन्य पद पर बैठा है, लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है। नाम चाहे कुछ भी रखा जाए, काम वही पुराना है, प्रदेश को अराजकता और गुंडागर्दी की ओर ले जाना। समाजवादी पार्टी ने अपने शासनकाल में उत्तर प्रदेश में अव्यवस्था और अराजकता का वातावरण बनाया, जिससे प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ। बहन-बेटियों की सुरक्षा खतरे में पड़ी, अन्नदाता किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा और व्यापारी-उद्यमियों को प्रदेश छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा।

देश के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का 55 प्रतिशत यूपी में 

मुख्यमंत्री ने फार्मा सेक्टर से जुड़े एक बड़े उद्यमी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस उद्यमी की आंखों में आंसू थे। वह कह रहा था कि हर सांझ के बाद एक सवेरा होता है और आज उत्तर प्रदेश में विकास देखकर उसे वही सवेरा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश नई पहचान गढ़ रहा है। आज उत्तर प्रदेश में जल, थल और नभ तीनों क्षेत्रों में बेहतरीन कनेक्टिविटी विकसित हुई है। एक्सप्रेस-वे का विस्तृत जाल बिछ चुका है। पहले प्रदेश में मात्र डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि आज देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है।
 
प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। 21 फरवरी को प्रधानमंत्री द्वारा गौतम बुद्ध नगर जनपद में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर (फेम) यूनिट की आधारशिला रखी जाएगी और 22 फरवरी को देश की पहली रैपिड रेल का उद्घाटन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले मेरठ से दिल्ली की दूरी तय करने में तीन से पांच-छह घंटे लग जाते थे, जाम आम बात थी और सुरक्षा का अभाव था। राह चलते वाहन चोरी की घटनाएं होती थीं, लेकिन अब दिल्ली-मेरठ के बीच 12 लेन का हाईवे तैयार है और यह दूरी लगभग 45 मिनट में तय की जा सकती है। रैपिड रेल के संचालन से भी यह दूरी 45 मिनट में पूरी होगी।

जेवर एयरपोर्ट का शीघ्र ही होगा शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 22 एक्सप्रेस-वे का बेहतरीन नेटवर्क है। इनमें सात क्रियाशील हैं, पांच निर्माणाधीन हैं और 10 पर कार्य चल रहा है। मेट्रो सेवाएं छह शहरों में संचालित हो रही हैं और मेरठ में भी 22 फरवरी को संचालन प्रारंभ किया जाएगा। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन भी उत्तर प्रदेश में है। वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वॉटर-वे संचालित है और वाराणसी में देश का पहला मल्टीमॉडल टर्मिनल स्थापित किया गया है। 
 
रामनगर, चंदौली, मिर्जापुर और गाजीपुर में टर्मिनल एवं फ्रेट विलेज विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभर रहा है। पहले प्रदेश में दो एयरपोर्ट पूर्ण रूप से संचालित थे और दो आंशिक रूप से, जबकि आज 16 घरेलू और चार अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पूरी तरह संचालित हैं। जेवर में पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तैयार है और शीघ्र ही इसका भी शुभारंभ किया जाएगा। देश का पहला एमआरओ (एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस एंड रिपेयर) भी उत्तर प्रदेश में स्थापित होने जा रहा है, जिससे विमान रखरखाव का कार्य अब प्रदेश में ही होगा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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