Mahashivratri पर्व पर त्रिवेणी संगम में उमड़ पड़ा आस्था का सैलाब, पर्व स्नान के बाद की पूजा-अर्चना

Last Updated: शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020 (11:51 IST)
प्रयागराज। आस्था, विश्वास और संस्कृतियों के संगम में तीर्थराज प्रयाग के माघ मेले के अंतिम स्नान पर्व 'महाशिवरात्रि' पर पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अंत:सलिलस्वरूपा सरस्वती के तट पर श्रद्धालुओं की आस्था हिलोरें मार रही है।
संगम किनारे दूधिया रोशनी के बीच तड़के 4 बजे से ही महिला, पुरुष, युवा, बच्चे और दिव्यांग श्रद्धालु त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने के साथ 'ॐ नम: शिवाय', 'हर-हर महादेव', 'हर हर-बम बम' के जप लगातार करते जा रहे हैं। कोई गंगा मइया को स्मरण कर रहा है।
ने महाशिवरात्रि पर करीब 5 से 10 लाख के बीच श्रद्धालुओं के पुण्य की डुबकी लगाने की संभावना व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि 10 बजे तक 2.50 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मेला क्षेत्र में 8 मजिस्ट्रेटों के साथ सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी लगाया गया है।
जल पुलिस प्रभारी कडेदीन यादव ने बताया कि सभी स्नान घाटों पर 80 गोताखोरों के साथ जल पुलिस भी मौजूद हैं। संगम में बेरीकेडिंग किया गया है जिससे कि स्नानार्थी उसके पार नहीं जाएं। बावजूद इसके जल पुलिस लगातार इस पर चौकसी बरत रही है। उन्होंने बताया कि स्नान कुशलतापूर्वक हो रहा है। किसी प्रकार की अप्रिय घटना का कहीं से कोई समाचार नहीं है।

गौरतलब है कि तड़के हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाओं के बीच श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दिया। श्रद्धालुओं की आस्था सर्द हवाओं पर भारी पड़ती नजर आ रही थी। आखिरी स्नान होने के कारण घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी नजर आ रही है।
त्रिवेणी में कुछ लोग पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं तो कुछ महिलाएं स्नान के बाद घाट पर ही सूर्य को अर्घ्य दे रही हैं। श्रद्धालु महिलाएं परिवार की खुशहाली के लिए गंगा मइया को दूध, पान व फूल अर्पण कर आरती उतार रही हैं।

श्रद्धा से भरपूर श्रद्धालुओं का कारवां सिर पर गठरी और कंधे पर कमरी रखे की सड़कों, रेलवे स्‍टेशनों, बस अड्डों से संगम क्षेत्र की ओर खरामा-खरामा लगातार बढ़ता चला आ रहा है। सिर पर गठरी का बोझ रखे दीन-दुनिया से बेपरवाह श्रद्धालुओं का लक्ष्य त्रिवेणी में परिवार और सगे-संबंधियों के लिए आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करना है।
दूरदराज से पहुंचे त्रिवेणी में एकसाथ वृद्ध, युवा, बच्चे, दिव्यांग, अमीर-गरीब, रोगी को एकसाथ स्नान करते देख अनेकता में एकता के साथ लघु भारत और विभिन्न संस्कृतियों का बोध होता है।

पौष पूर्णिमा 10 जनवरी से शुरू हुए 43 दिनों तक चलने वाले माघ मेले में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की विस्तीर्ण रेती पर बसे रंग-बिरंगे तंबुओं की आध्यात्मिक नगरी में आध्यात्मिक बयार बह रही थी।
माघी पूर्णिमा स्नान के बाद कल्पवासी साधु-महात्मा एवं संत वापस लौट गए हैं और बचे हुए कुछ संत-महात्माओं के महाशिवरात्रि स्नान के बाद मेले की छटा समाप्त हो जाएगी।
(फ़ाइल चित्र)


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