2020 : राम मंदिर आंदोलन से दशकों पुराना संबंध
Chief Minister Yogi Adityanath: अयोध्या में 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का भूमि पूजन और फिर 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह का सफल आयोजन। दरअसल, राम मंदिर आंदोलन और योगी आदित्यनाथ का संबंध दशकों पुराना है। उनके दादा गुरु महंत दिग्विजयनाथ और उनके गुरु महंत अवेद्यनाथ राम मंदिर आंदोलन के मुख्य स्तंभ थे। योगी जी ने न केवल इस मशाल को आगे बढ़ाया, बल्कि इसे इसके तार्किक अंत (निर्माण) तक पहुंचाया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में शांति व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन योगी ने सुनिश्चित किया कि पूरे राज्य में कहीं भी कोई हिंसा न हो। इतना ही नहीं उन्होंने मंदिर परिसर के लिए आवश्यक भूमि और ट्रस्ट को दी जाने वाली सहायता को सरकारी स्तर पर तत्काल मंजूरी दी। योगी आदित्यनाथ का मानना था कि मंदिर केवल एक इमारत नहीं, बल्कि गौरव का प्रतीक है। इसलिए उन्होंने पूरी अयोध्या को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में बदल दिया।
मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यजमान की भूमिका में पूरे आयोजन की व्यवस्था खुद संभालकर, इस ऐतिहासिक क्षण को सफल बनाया। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने मेहमानों का 'अतिथि देवो भव:' के भाव से स्वागत किया। योगी आदित्यनाथ ने मंदिर निर्माण के दौरान स्वयं दर्जनों बार अयोध्या का दौरा किया और एक-एक पत्थर के तराशे जाने से लेकर राम पथ के निर्माण की प्रगति का जायजा लिया।
अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन और महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट की परियोजनाओं को रिकॉर्ड समय में पूरा करवाया ताकि दुनिया भर के भक्त आसानी से पहुंच सकें। संकरी गलियों वाली अयोध्या को चौड़ी और भव्य सड़कों वाला शहर बनाया। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने अयोध्या में भव्य दीपोत्सव परंपरा की शुरुआत की। हर साल दीपों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने अयोध्या की ओर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा और इसे राम मंदिर निर्माण के प्रति जनभावनाओं को जगाने का माध्यम बनाया।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala