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2014 : दलितों और पिछड़ों के प्रति समावेशी दृष्टिकोण
Chief Minister Yogi Adityanath: योगी आदित्यनाथ 12 सितंबर, 2014 को अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ के निधन के बाद गोरखनाथ मठ के पीठाधीश्वर बने। योगी अपनी कड़ी दिनचर्या के लिए भी जाने जाते हैं। वे रोजाना सुबह 3:30 से 4:00 बजे के बीच उठ जाते हैं। योग और पूजा-पाठ के बाद वे अपने दिन की शुरुआत करते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी इस दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया है। गोरखनाथ मठ के पीठाधीश्वर के रूप में योगी आदित्यनाथ की भूमिका केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत प्रभावशाली है। वे नाथ संप्रदाय के सर्वोच्च गुरुओं में से एक हैं।
गोरखनाथ पीठ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जातिविहीन व्यवस्था है। पीठाधीश्वर के रूप में योगी आदित्यनाथ ने इसे और मजबूत किया है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी मेला के अवसर पर हर जाति और धर्म के लोग एक साथ मिलकर बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। मठ की रसोई में जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। दलित और पिछड़ी जातियों के प्रति उनका दृष्टिकोण हमेशा समावेशी रहा है।
मठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि एक बड़ा सेवा केंद्र है। पीठाधीश्वर के रूप में वे दर्जनों शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों का संचालन करते हैं। योगी जी ने पीठाधीश्वर के रूप में मठ की गौशाला को आधुनिक और आदर्श बनाया है। वे स्वयं गायों की सेवा करते हैं। उन्होंने किसानों को जैविक खेती और स्वदेशी तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए मठ के माध्यम से कई अभियान चलाए हैं।
