तहलका से लेकर खुद की जिंदगी में यौन उत्पीड़न के तहलके तक, आखिर कौन हैं तरुण तेजपाल?
- पत्रकारिता से जुड़े थे तरुण तेजपाल।
- इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, आउटलुक में काम किया।
- साल 2000 में तहलका वेबसाइट शुरू की।
यौन उत्पीड़न मामला : नवंबर 2013 में गोवा के एक होटल में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी एक महिला सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले में तहलका के मामले में दोषी ठहराया था। उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। वर्ष 2021 में गोवा की एक सत्र अदालत ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने उस फैसले को पलट दिया और अगस्त 2026 में उन्हें इस मामले में बलात्कार (रेप) का दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
दोषी ठहराये जाने के बाद क्या बोले थे तेजपाल?
कोर्ट से दोषी ठहराये जो के बाद तरूण तेजपाल ने कहा था, "मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है और इसके अलावा कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं। कृपया मेरे साथ नरमी बरतें"
कोर्ट से दोषी ठहराये जो के बाद तरूण तेजपाल ने कहा था, "मैं 62 साल का हूं और मेरा मानना है कि मैं पीड़ित हूं। मेरी पत्नी है और इसके अलावा कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि हम अपील कर सकते हैं। कृपया मेरे साथ नरमी बरतें"
कौन हैं तेजपाल : तेजपाल का जन्म 15 मार्च 1963 को पंजाब के जालंधर शहर में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके चलते उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने का मौका मिला। तेजपाल ने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक (ग्रेजुएट) की पढ़ाई की है। तेजपाल की शादी साल 1985 में हुई थी और उनकी पत्नी का नाम गीता बत्रा है। दोनों कॉलेज में साथ थे। उनकी दो बेटियां हैं, एक का नाम टिया और दूसरी का कारा है।
पत्रकारिता के साथ पब्लिशर बने : 56 साल के तरुण तेजपाल भारत के प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक और उपन्यासकार रहे हैं। उनके पास पत्रकारिता का 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। साल 1980 में 'द इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप में नौकरी करते हुए उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद 'इंडिया-2000' नाम की एक मैगजीन में नौकरी करने के लिए वे नई दिल्ली आ गए।
पब्लिशिंग कंपनी 'इंडिया इंक' : 1984 में वे बतौर सीनियर सब-एडिटर 'इंडिया टुडे' मैगजीन के लिए काम करने लगे। 1994 में 'फाइनेंशियल एक्सप्रेस' को ज्वॉइन कर लिया। इसके बाद वे 'आउटलुक पत्रिका' के साथ जुड़े और अगले कई सालों तक वहीं काम करते रहे। इसी दौरान उन्होंने खुद की पब्लिशिंग कंपनी 'इंडिया इंक' शुरू की। ये वही कंपनी है, जिसने 1998 में अरुंधति रॉय का उपन्यास 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' छापा था। जिसे बुकर प्राइज मिला था।
तहलका शुरू किया : आउटलुक छोड़ने के बाद मार्च 2000 में उन्होंने एक अन्य पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर ऑनलाइन इंवेस्टिगेटिव वेबसाइट तहलका डॉट कॉम शुरू की। साल 2004 में ये एक टैब्लॉइड न्यूजपेपर में तब्दील हो गई, वहीं 2007 में इसे मैगजीन का रूप दे दिया गया।

