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तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा, फैसले को सुप्रीम कोर्ट में करेंगे चैलेंज

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बलात्कार के एक मामले में दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें 10 साल कैद की सजा सुनाई। वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
 
साल 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को 2021 में बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सरकार की अपील पर जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।

इस मामले में गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने कहा कि 0 साल की सजा के बारे में अभी हम मामले का अध्ययन करेंगे। हम तय करेंगे कि आदेश के उस हिस्से को चुनौती दी जाए या नहीं। हमने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। हम चाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा जुर्माना लगाया जाए। अब चार हफ्ते का समय दिया गया है, जबकि शुरू में दो हफ्ते का समय बताया गया था। मुझे और आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील को चैंबर में बुलाया गया था। वहां जजों ने हमें बताया कि उन्हें सरेंडर करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया जाएगा।

फैसले पर क्या बोले तरुण तेजपाल

सजा सुनाए जाने से पहले मीडिया से बातचीत में तरुण तेजपाल ने कहा है कि वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि तहलका मैगजीन की वजह से उनसे राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है।

ट्रायल कोर्ट से मिली थी तरुण तेजपाल को राहत

इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का यह फैसला त्रुटिपूर्ण था।
 

क्या है मामला?

साल 2013 में तरुण तेजपाल के साथ काम करने वाली एक युवती ने उन पर गोवा के एक फाइव स्टार होटल की लिफ्ट में रेप का आरोप लगाया था। इस मामले में 30 नवंबर 2013 को तरुण तेजपाल को गिरफ्तार किया गया था। गोवा सेशन कोर्ट ने साढ़े सात साल बाद 2021 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
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