गुजरात में एनालॉग पनीर, बटर और चीज़ पर लगा बैन, स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने किया बड़ा ऐलान
गुजरात सरकार ने राज्य में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने बुधवार को घोषणा की कि पूरे गुजरात में अब अमानक (non-standard) एनालॉग पनीर, मक्खन और चीज़ के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हित में लिए गए इस सख्त फैसले का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
1 . सैंपल टेस्टिंग और ग्राहकों के साथ धोखा
राज्य के फूड एंड ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDCA) द्वारा बड़े पैमाने पर सैंपल एकत्र करके लैब में टेस्टिंग की गई थी, जिसमें बाजार में घटिया और कृत्रिम डेरी विकल्पों के बेचे जाने के चौंकाने वाले मामले सामने आए। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि वनस्पति तेल और गैर-डेरी सामग्रियों से बने उत्पादों को पनीर या चीज़ बताकर बेचकर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं।
2. डेरी किसानों के हित और शुद्धता की रक्षा
गुजरात देश का एक प्रमुख डेरी राज्य है, जहाँ लाखों दुग्ध उत्पादक किसान उच्च गुणवत्ता वाले डेरी उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। जब ग्राहक पनीर या बटर खरीदते हैं, तो वे शुद्ध दूध से बने उत्पादों की उम्मीद करते हैं। कृत्रिम और घटिया एनालॉग उत्पादों के कारण शुद्ध डेरी उत्पाद बनाने वाले असली किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसे रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।
3. कानूनी कार्रवाई और राज्य सरकार की अपील
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट (FSSA), 2006 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए सरकार ने यह प्रतिबंध लागू किया है। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यापारी या फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) के खिलाफ FSSA के तहत सख्त कानूनी सजा दी जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने सभी उत्पादकों, व्यापारियों, होटलों, रेस्टोरेंटों और कैटरर्स से कानून का कड़ाई से पालन करने और केवल प्रमाणित व असली डेरी उत्पादों का ही उपयोग करने की अपील की है।
एनालॉग पनीर क्या है? जानिए इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव और सरकारी आदेश से जुड़ी जानकारी
राज्य सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और असली डेरी किसानों के हित में घटिया एनालॉग उत्पादों पर सख्त बैन लगा दिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हर नागरिक तक शुद्ध, सुरक्षित और प्रमाणित भोजन पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। गुजरात का अमूल जैसा डेरी ब्रांड आज पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है, ऐसे में बाजार में शुद्ध दूध के नाम पर कृत्रिम विकल्पों की बिक्री को रोकना बेहद जरूरी हो गया था।
1 . एनालॉग पनीर बनाने की प्रक्रिया
एनालॉग पनीर असली दूध से नहीं बनाया जाता है। इसे पानी, सस्ते मिल्क पाउडर, स्टार्च और पाम ऑयल जैसे वनस्पति तेलों को मिलाकर तैयार किया जाता है। आमतौर पर तेल और पानी आपस में नहीं मिलते, इसलिए उन्हें एकसार करने के लिए विशेष प्रकार के इमल्सीफायर मिलाए जाते हैं। इस कृत्रिम मिश्रण को गर्म करके उसमें एसिड मिलाकर जमाया जाता है, जिससे यह दिखने में बिल्कुल असली पनीर की तरह ही ठोस और सफेद नजर आता है।
2. असली और एनालॉग पनीर में अंतर
प्राकृतिक पनीर शुद्ध दूध को नींबू या सिरके (vinegar) से फाड़कर बनाया जाता है, जिसमें प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। दूसरी ओर, एनालॉग पनीर पूरी तरह से वनस्पति वसा (fat), स्टार्च और रसायनों का मिश्रण है। यह काफी सस्ता पड़ता है, इसलिए लागत बचाने के उद्देश्य से कई होटलों और ढाबों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है।
3. स्वास्थ्य पर प्रभाव और 'स्वस्थ गुजरात' का संकल्प
रसायनों और वनस्पति तेल से बना यह एनालॉग पनीर यदि बार-बार या ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। "स्वस्थ गुजरात" के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार ने इस पनीर पर रोक लगाकर शुद्ध भोजन की गारंटी दी है। डेरी उद्योग की रक्षा करने के साथ-साथ नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाला और सही भोजन प्रदान करना ही इस कड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य है।

