1. समाचार
  2. ऑटो मोबाइल
  3. समाचार
  4. supreme court road accidents anpr toll plaza no insurance no fuel insurance rule

No Insurance, No Fuel प्रोजेक्ट क्या है, सुप्रीम कोर्ट क्यों करना चाहता है लागू और आप पर कैसे पड़ेगा असर

no insurance no fuel
सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते सड़क हादसों और टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम को लेकर मंगलवार को गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने केंद्र सरकार को चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत पारंपरिक टोल प्लाजा की जगह Automatic Number Plate Recognition (ANPR) जैसी तकनीक आधारित ऑटोमैटिक व्हीकल डिटेक्शन सिस्टम लागू करने की योजना है, जिससे वाहनों को टोल भुगतान के लिए रुकना न पड़े।
 जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर पर ऐसी व्यवस्था का परीक्षण किया जाए, जिसमें ANPR तकनीक के जरिए वाहनों की पहचान कर उन्हें बिना रुके टोल प्वाइंट से गुजरने दिया जा सके।
 

करीब 56 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस

 
सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस के नियमों के पालन में कमी पर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट के मुताबिक, वित्त मामलों की स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की सड़कों पर चलने वाले करीब 56 फीसदी वाहन बिना वैध बीमा के हैं।
 
कोर्ट ने इस स्थिति को देखते हुए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है। इसके तहत वाहन के इंश्योरेंस स्टेटस को पेट्रोल पंप पर ईंधन बिक्री से जोड़ा जा सकता है।
 

‘No Insurance, No Fuel’ पर विचार

 
प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी वाहन का वैध इंश्योरेंस नहीं है तो उसका इंश्योरेंस रिन्यू होने तक पेट्रोल पंप पर उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था से बिना बीमा और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की पहचान करने में मदद मिलेगी और वाहन मालिकों को वैध इंश्योरेंस बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से कोई आपत्ति नहीं है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए ANPR कैमरों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
 

नई कार और दोपहिया के लिए बढ़ेगा इंश्योरेंस कवर

 
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2018 के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें नई कार खरीदने या रजिस्ट्रेशन के समय तीन साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच साल का बीमा अनिवार्य किया गया था।
 
कोर्ट ने कहा कि करीब आठ साल बीत जाने के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन अब भी बिना बीमा के चल रहे हैं। सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हित को ध्यान में रखते हुए पीठ ने नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल करने का निर्देश दिया। IRDAI को इस संबंध में तत्काल जरूरी निर्देश जारी करने को कहा गया है।
 

30.48 करोड़ वाहनों में 16.54 करोड़ बिना बीमा

 
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि देश में रजिस्टर्ड 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा के हैं। कोर्ट ने कहा कि बीमा नहीं होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में घायल या मृत लोगों के परिवारों को समय पर मुआवजा मिलने में परेशानी होती है। पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देना नहीं है, बल्कि उन्हें मुआवजे के लिए लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से बचाना भी है।
 
कोर्ट ने कहा कि बिना बीमा वाले वाहनों के कारण दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक मदद नहीं मिल पाती। खासतौर पर मौत या स्थायी विकलांगता के मामलों में परिवारों पर इसका गंभीर आर्थिक असर पड़ता है।
 

ANPR कैमरों से पकड़े जाएंगे बिना बीमा वाले वाहन

 
बीमा नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI और MoRTH को चुनिंदा राज्यों में ANPR कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। इन कैमरों को Insurance Information Bureau (IIB) और VAHAN Database से जोड़ा जा सकता है। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की ऑटोमैटिक पहचान की जा सकेगी और उनके खिलाफ ई-चालान जारी किया जा सकेगा।
 
कोर्ट ने यह भी कहा कि वाहन जांच के दौरान पुलिस के पास बीमा की स्थिति जांचने के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था नहीं है। इसलिए राज्य पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल एप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, जो Insurance Information Bureau और VAHAN पोर्टल से जुड़े हों। इससे पुलिस मौके पर ही वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस रियल टाइम में जांच सकेगी।

वाहन मालिकों को मिलेंगे कई इंश्योरेंस विकल्प

 
कोर्ट ने IRDAI को निजी वाहनों के मालिकों के लिए कई तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। इनमें Add-on Covers, Personal Accident Cover और Own-Damage Cover जैसे विकल्प शामिल होंगे। इसके साथ मोटर वाहन अधिनियम के न्यूनतम अनिवार्य प्रावधानों को पूरा करने वाली बेस पॉलिसी भी उपलब्ध रहेगी।
 
सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने कहा कि देश में थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस अनिवार्य होने के बावजूद नियमों का पालन पर्याप्त नहीं है। इसका सीधा असर सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें मुआवजा हासिल करने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
अगला लेख
15 अगस्त 2026: स्कूल या कॉलेज में भाषण देना है? चुनें ये 5 दमदार टॉपिक्स