कांवड़ की जगह हाथ में 'तेजस' का हैंडल, बीटेक छात्र ने बनाया अनोखा इलेक्ट्रिक वाहन, वीडियो वायरल
अक्सर कहा जाता है कि 'मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है'। ऐसा ही नया कुछ कर दिखाने का चाह में मेरठ के एक युवा ने मात्र 45 हजार रूपये में एक अनोखी बाइक तैयार की और उससे हरिद्वार गंगाजल लेने पहुंच गया। कांवड़ यात्रा मार्ग पर जिसने इस बाइक कै देखा वह दीवाना हो गया। बाइक तैयार करने वाला बीटेक का यह छात्र मेरठ का है और उसका दावा है कि उसने तीन दिन में बैटरी से चलने वाली बाइक तैयार की है।
कांवड़ यात्रा के रास्ते पर एक से एक आकर्षक और मंहगी कांवड़ दिखाई दे रही है। ऐसे में NH-58 से गुजर रही कांवड़ यात्रा में बीटेक छात्र अक्षय कुमार की बनाई बैटरी चालित बाइक खास चर्चा में है। अक्षय ने अपनी इस अनोखी कांवड़ को तेजस नाम दिया है और इसी पर सवार होकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर मेरठ अपने घर आ रहा है।
आम तौर पर कांवड़िए कंधे पर कांवड़ उठाकर पैदल यात्रा करते नजर आते हैं, लेकिन अक्षय ने अपनी तकनीकी रुचि से तैयार तेजस बाइक पर सवार होकर कांवड़ यात्रा का हिस्सा बना है। मैकेनिकल क्षेत्र में दिलचस्पी रखने वाले अक्षय ने बताया कि कांवड़ यात्रा पर जाने की इच्छा थी, साथ ही मन में अनोखी कांवड़ लाने का विचार था, जिसके चलते उसने अपने हाथों से तैयार बैट्री बाइक को गंगाजल लाने का माध्यम बनाया। अक्षय का कहना है कि पढ़ाई और तकनीकी कौशल दोनों को प्रदर्शित करने का इससे अच्छा कोई और माध्यम नही हो सकता है।
तीन दिन में तैयार किया मॉडल
अक्षय के मुताबिक तेजस को तैयार करने में उसे महज तीन दिन का समय लगा। बाइक के निर्माण में मोटर, बैटरी, कंट्रोलर, चार्जर और हेडलाइट सहित कई उपकरण लगाए गए हैं। वजन कम रखने के लिए पीवीसी पाइप का इस्तेमाल किया गया है। इस पूरे प्रयोग पर करीब 45 हजार रुपये खर्च हुए हैं। अक्षय मानते है कि बाइक तैयार करने के पीछे केवल यात्रा के लिए वाहन तैयार करना नहीं था, बल्कि अपने तकनीकी ज्ञान को व्यवहारिक रूप देने का भी था।
फुल चार्ज पर 150 किलोमीटर तक चलने का दावा
अक्षय के मुताबिक तेजस की बैटरी करीब चार घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है। एक बार चार्ज करने के बाद बाइक लगभग 150 किलोमीटर तक चल सकती है। इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। हालांकि कांवड़ यात्रा के दौरान अक्षय की तेजस दौड़ नही पा रही है, क्योंकि इस समय सड़कों पर कांवड़ियों का राज है, जिसके चलते 'तेजस बाइक' की गति को नियंत्रित रखना पड़ रहा है।
साथ चल रहे पढ़ाई करने वाले साथी
अक्षय अकेले इस यात्रा पर नहीं है। उसके चार-पांच साथी भी उसके साथ कांवड़ यात्रा में शामिल हैं। ये सभी पढ़ाई करने वाले युवा हैं। अक्षय का कहना है कि इस बाइक को बनाने के पीछे उनका मकसद युवाओं को यह बताना भी है कि कॉलेज में हासिल किया गया तकनीकी ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसके मुताबिक पढ़ाई के साथ अगर युवा अपने हुनर को प्रयोग में लाएं तो छोटे स्तर पर भी नए और उपयोगी मॉडल तैयार किए जा सकते हैं।
तेजस देखने के लिए रुक रहे राहगीर
NH-58 पर जैसे-जैसे अक्षय की तेजस आगे बढ़ रही है, लोगों की निगाहें भी उस पर टिक रही हैं। सड़क किनारे खड़े लोग बाइक की बनावट और उसके काम करने के तरीके को जानने के लिए रुक रहे हैं। कई लोग अक्षय से बातचीत कर बाइक के बारे में जानकारी लेते नजर आए। कांवड़ मार्ग पर ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी भी इस अनोखी बाइक के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। इस तरह अक्षय की तेजस इस बार कांवड़ यात्रा में श्रद्धा के साथ तकनीक और युवा लग्न की अलग पहचान बन गई है।

