Electric Flying Car : पेट्रोल-डीजल नहीं, बिजली से उड़ने की तैयारी, पहाड़ की समस्या से आया आइडिया, छात्र ने किया चमत्कार, चीन के दावे को नकारा
अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किल रास्ते भी नई राह दिखा सकते हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले रवि तम्ता ने इसी सोच को हकीकत में बदलने की कोशिश की है। पहाड़ी इलाकों में सफर की मुश्किलों को करीब से देखने के बाद उन्होंने एक ऐसी इलेक्ट्रिक उड़ने वाली कार तैयार की है, जो भविष्य में पहाड़ों में यात्रा को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
रवि तम्ता ने अपने स्टार्टअप Hapida Sky Private Limited के जरिए सिंगल-सीटर फ्लाइंग व्हीकल HAPIDA SKYNeX डेवलप किया है। इसके प्रोटोटाइप का सफल टेस्ट फ्लाइट भी किया जा चुका है। पेट्रोल-डीजल नहीं, बिजली से उड़ने की तैयारी
HAPIDA SKYNeX की सबसे खास बात यह है कि इसे पारंपरिक विमान की तरह एविएशन फ्यूल से नहीं, बल्कि बिजली से चलाने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी इसे पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल के तौर पर विकसित कर रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य में लोगों को परिवहन का ज्यादा साफ और सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराना है। फिलहाल यह वाहन प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसे व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं माना जा सकता। लेकिन इसकी शुरुआती उड़ान ने इस इनोवेशन को चर्चा में जरूर ला दिया है।
पहाड़ की समस्या से आया उड़ने वाली कार का आइडिया
रवि तम्ता के लिए यह सिर्फ कोई तकनीकी प्रयोग नहीं था। इसके पीछे उनके अपने पहाड़ी क्षेत्र की रोजमर्रा की समस्या थी। अल्मोड़ा के काफलीखान गांव, जो जागेश्वर धाम के पास स्थित है, से आने वाले रवि ने देखा कि पहाड़ों में कम दूरी भी सड़क मार्ग से तय करने में काफी समय लग जाता है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उनके गांव और घर के बीच करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग 90 मिनट तक लग सकते हैं। तम्ता का मानना है कि अगर व्यक्तिगत उड़ने वाला वाहन सफल होता है तो यही दूरी भविष्य में महज 10 से 15 मिनट में तय की जा सकती है। यही सोच धीरे-धीरे उनके सपने में बदली और फिर कई वर्षों की मेहनत के बाद HAPIDA SKYNeX का प्रोटोटाइप तैयार हुआ।
ड्रोन तकनीक को बनाया आधार
रवि तम्ता ने इस प्रोजेक्ट पर कई वर्षों तक काम किया। उन्होंने मॉडिफाइड ड्रोन टेक्नोलॉजी की मदद से ऐसा वाहन विकसित करने की कोशिश की, जो एक व्यक्ति को लेकर उड़ सके। अल्मोड़ा के खुले क्षेत्र में रवि और उनकी टीम ने इसके शुरुआती उड़ान परीक्षण किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर वाहन के विकास और टेस्टिंग से जुड़े वीडियो भी साझा किए।
सफल प्रदर्शन के बाद उन्हें कई लोगों के संदेश और फोन आने लगे। रवि ने सोशल मीडिया पर बताया कि प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत नहीं कर पाने के कारण अब वह खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए वाहन के बारे में जानकारी साझा कर रहे हैं।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा के युवा इनोवेटर रवि टम्टा जी को ड्रोन तकनीक में नवाचार करते हुए HAPIDA SKYNEX प्रोटोटाइप के सफल उड़ान परीक्षण पर हार्दिक बधाई।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 7, 2026
आपकी यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि हमारे युवाओं में प्रतिभा, नवाचार और वैज्ञानिक सोच की कोई कमी नहीं है। आपका यह अभिनव प्रयास… pic.twitter.com/sR7KZ8AWoO
मुख्यमंत्री ने भी शेयर किया वीडियो
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी रवि तम्ता के फ्लाइंग व्हीकल का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। इससे इस स्थानीय इनोवेशन को और ज्यादा लोगों तक पहुंच मिली।
चीन से आयात के दावे को किया खारिज
फ्लाइंग व्हीकल को लेकर कुछ जगहों पर इसके चीन से आयात किए जाने के दावे भी सामने आए। रवि तम्ता ने इन दावों को खारिज किया है। उन्होंने पत्रकारों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में आने का न्योता दिया है, ताकि वे खुद देख सकें कि वाहन को किस तरह विकसित किया गया है।
बाकी है अभी लंबा सफर
HAPIDA SKYNeX की सफल टेस्ट फ्लाइट निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसे अभी व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह फिलहाल प्रोटोटाइप स्टेज में है और इसके सुरक्षित, तकनीकी तथा व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले कई चरणों से गुजरना बाकी है। फिर भी रवि तम्ता की कहानी यह बताती है कि बड़े इनोवेशन हमेशा बड़े शहरों या बड़ी कंपनियों से ही नहीं आते। कभी-कभी किसी छोटे पहाड़ी गांव में रहने वाला व्यक्ति अपने आसपास की समस्या को देखकर ऐसा सपना देखता है, जिसे बाकी दुनिया असंभव मानती है।

