देख बहारें होली की

शेरों शायरी

holi-colours
FILE

जब फागुन के रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की।

और डफ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की।

परियों के रंग दमकते हों तब देख बहारें होली की।

खम शीश-ए-जाम छलकते हों तब देख बहारें होली की।

महबूब नशे में छकते हों, तब देख बहारें होली की।

गुलजार खिलें हों परियों के और मजलिस की तैयारी हो।

कपड़ों पर रंग के छीटों से खुश रंग अजब गुलकारी हो।

मुंह लाल, गुलाबी आंखें हों और हाथों में पिचकारी हो।

उस रंग भरी पिचकारी को अंगिया पर तक कर मारी हो।

सीनों से रंग ढलकते हों तब देख बहारें होली की।


- नजीर अकबराबादी



और भी पढ़ें :