UP election 2022 : आर्य नगर विधानसभा में 4 बार सपा ने दर्ज की जीत, 2 बार भाजपा ने मारा मैदान

अवनीश कुमार| Last Updated: रविवार, 9 जनवरी 2022 (19:46 IST)
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लखनऊ।पिछले में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैजिक जनता में झूमकर चल रहा था तब भी आर्य नगर सीट पर भाजपा को जीत नसीब नहीं हुई। हालांकि इससे पहले इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा था और सपा के अमिताभ वाजपेयी ने भाजपा के दिग्गज नेता सलिल विश्नोई को हरा दिया था। इस सीट पर सपा 4 बार जीत दर्ज कर चुकी है तो भाजपा 2 बार। अब भाजपा इस सीट पर कमल खिलाने के लिए जुटी हुई है।
आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है और सपा यहां चार बार जीत दर्ज कर चुकी है। हालांकि दो-दो बार यह सीट भाजपा और कांग्रेस के खाते में गई और एक-एक बार जनता दल व जनता पार्टी के उम्मीदवार को भी जनता ने मौका दिया।

बसपा-सपा के गठबंधन के समय भी उम्मीदवार ने 1993 में जीत दर्ज की थी। पिछले चुनाव में सपा के अमिताभ वाजपेयी ने भाजपा के विधायक सलिल विश्नोई को हराकर जीत दर्ज की। अब समाजवादी पार्टी जीत को कायम रखना चाहती है तो भाजपा भी हार का बदला लेने के लिए जुगत लगा रही है।

भाजपा में कई दावेदार मैदान में उतरने को लेकर इसलिए बेताब हैं कि इस सीट के पूर्व विधायक सलिल विश्नोई एमएलसी बन चुके हैं। हालांकि वह भी दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि सलिल विश्नोई को टिकट नहीं दिया जाएगा। इसी के चलते वैश्य से लेकर ब्राह्मण उम्मीदवारों की लाइन लगी हुई है।

सबसे अधिक हैं मुस्लिम मतदाता : इस सीट पर सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता हैं और दूसरे नंबर पर वैश्य मतदाता हैं। तीसरे नंबर पर ब्राह्मण मतदाता हैं। मुस्लिम और ब्राह्मण समीकरण के चलते पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी लहर होने के बावजूद सपा के अमिताभ वाजपेयी चुनाव मैदान मारने में सफल रहे।

जानकारी के अनुसार यहां पर एक लाख दस हजार मुस्लिम मतदाता, नब्बे हजार वैश्य, 28 हजार ब्राह्मण और दो से चार हजार के बीच क्षत्रिय, कायस्थ मतदाता हैं। इसके साथ ही करीब 30 हजार मतदाता दलित हैं।

वैश्य उम्मीदवार पर दांव लगा सकती है भाजपा : विधानसभा सीट पर मतदाताओं के लिहाज से सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता हैं और दूसरे नंबर पर वैश्य मतदाता हैं। ऐसे में भाजपा वैश्य उम्मीदवार पर दांव लगाना अधिक उचित समझेगी। भाजपा जीत के लिए वैश्यों के साथ दलितों को अपने पाले में करने में पांच साल से जुटी हुई है, जबकि दूसरी तरफ सपा से वर्तमान विधायक अमिताभ वाजपेयी ही चुनाव मैदान में उतरेंगे।

उनके साथ ब्राह्मण के साथ मजबूती से मुस्लिम मतदाता खड़ा हुआ है। इसके साथ ही पांच साल वह जनता के बीच रहे और दलित मतदाताओं में भी पैठ बनाते रहे। ऐसे में पूरी संभावना है कि भाजपा वैश्य उम्मीदवार को ही प्रमुखता देगी।

एआईएमआईएम उम्मीदवार से भाजपा को मिलेगा बल : मुस्लिम बाहुल्य आर्य नगर सीट पर अबकी बार एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन अपना उम्मीदवार मुस्लिम उतारने का ऐलान कर चुके हैं। इससे भाजपा को सीधा फायदा मिलना स्वाभाविक है। पार्टी यह मानकर चल रही है कि एआईएमआईएम से मुस्लिम उम्मीदवार आने से मुस्लिमों के वोट में बंटवारा होगा और वैश्य व दलित के साथ पार्टी की विचारधारा से जुड़े मतदाताओं की बदौलत चुनाव जीता जा सकता है।

अन्य दलों ने सिर्फ आपको वोट बैंक बनाकर रख दिया : उत्तर प्रदेश में होने वाले 2022 विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी के चलते आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने रविवार को लखनऊ में कहा कि अन्य दलों ने आपको वोट बैंक बनाकर रख दिया है।

कोई कहता है हिंदू हमारा वोट बैंक है, कोई कहता है मुस्लिम हमारा वोट बैंक है, कोई कहता है यादव, कोई कहता है ठाकुर, कोई कहता है ब्राह्मण और कोई कहता है निषाद हमारा वोट बैंक है।उन्होंने कहा कि यह जो राजनीतिक दलों ने 75 साल में आपको अपना वोट बैंक बनाया है, जो पैसे आपके बैंकों में जमा थे उन पैसों को खाली किया है और कुछ नहीं किया।

आज आपके सामने तमाम मुद्दे हैं, बेरोजगारी का सवाल है,किसानों का सवाल है, माता-बहनों की सुरक्षा का सवाल है।आम आदमी पार्टी की राजनीति नई राजनीति है और बदलाव की राजनीति है।लोग आज की तारीख में एक ही सवाल आपसे पूछते हैं कि दिल्ली मॉडल क्या है? किस तरह से केजरीवाल ने परिवर्तन किया और क्या-क्या काम वहां पर करके दिखाए? हम राजनीति करने नहीं आए थे, हम राजनीति को बदलने आए थे।

राजनीति को हमने बदला है, क्योंकि आम आदमी की जो राजनीति है, उसको हमने मुद्दों पर लाया है।अंत में उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते कहा कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसी सरकार आज चल रही है जिस सरकार ने जनता को ठगने, मूर्ख बनाने और 5 साल में धोखा देने का काम किया।जो वादे किए, वो पूरे नहीं हुए।



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