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Written By UN
Last Modified: शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026 (19:20 IST)

सूडान : बीमारी और भुखमरी के चंगुल में नन्ही ज़िंदगियां, विनाशकारी स्तर पर कुपोषण

United Nations News
United Nations News : संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि सूडान में निरन्तर हिंसा, अकाल और बीमारियों के कारण बच्चों की लगातार मौतें हो रही हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं पर हो रहे हमलों और मानवीय सहायता तक सीमित पहुंच के कारण उन तक मदद पहुंचाने के प्रयास गम्भीर रूप से बाधित हो रहे हैं।
 
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) के अनुसार, सूडानी सशस्त्र बलों और अतीत में उसके सहयोगी रहे अर्द्धसैनिक बल (RSF) में भीषण लड़ाई के बीच, उत्तर दारफ़ूर के कुछ हिस्सों में बच्चों की आधी से अधिक आबादी गम्भीर कुपोषण का शिकार हैं। यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र समर्थित वैश्विक खाद्य सुरक्षा निगरानी प्रणाली (IPC) के उन नवीनतम आंकड़ों के बाद आई है, जिसमें उम बारू, केरनोई और अत-ताइन क्षेत्रों में कुपोषण की स्थिति को विनाशकारी बताया गया है।
यूनीसेफ़ के प्रवक्ता रिकार्डो पिरेस ने आगाह किया है कि अत्यधिक भूख और कुपोषण का सबसे पहला असर बच्चों पर पड़ता है, ख़ासतौर पर सबसे छोटे, सबसे कमज़ोर और सबसे अधिक असुरक्षित बच्चों पर। सूडान में यह संकट तेज़ी से फैल रहा है, और 6 महीने से 5 वर्ष के बीच की आयु के बच्चों के लिए समय बीता जा रहा है।
 
यूएन एजेंसी ने बताया कि उम बारू और केरनोई जैसे इलाक़ों में अब अकाल से जुड़ी सीमाएं पार हो चुकी हैं, जबकि ये पहले जोखिम वाले क्षेत्र नहीं माने जाते थे। सूडान की सशस्त्र सेना और RSF के बीच अप्रैल 2023 में देश पर नियंत्रण के मुद्दे पर मतभेदों के बीच हिंसक टकराव भड़क उठा था।
पिछले वर्ष 26 अक्टूबर को RSF ने उत्तर दारफ़ूर प्रान्त की राजधानी अल फ़शर पर 1.5 साल की घेराबन्दी के बाद अपना क़ब्ज़ा किया, जहां बड़े पैमाने पर विस्थापन और अत्याचारों को अंजाम दिए जाने के आरोप सामने आए। इसके बाद लड़ाई अब कोर्दोफ़ान क्षेत्र में केन्द्रित हो गई है।
 

बुनियादी सेवाएं ध्वस्त

यूनीसेफ़ के अनुसार, युद्ध, बड़े पैमाने पर विस्थापन, बुनियादी सेवाओं का ध्वस्त होना और मानवीय सहायता तक बाधित पहुंच के कारण इन क्षेत्रों में भुखमरी की चेतावनी जारी की गई है। मगर ऐसी स्थितियां सूडान के अन्य बड़े हिस्सों में भी फैली हुई हैं।
रिकार्डो पिरेस ने आगाह किया कि यदि अकाल का ख़तरा इन इलाक़ों में मंडरा रहा है, तो वह फिर कहीं भी अपने पांव पसार सकता है। बीमारियों का फैलाव बच्चों के जीवन के लिए एक और गम्भीर ख़तरा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये बच्चे सिर्फ़ भूखे ही नहीं हैं, बल्कि अत-ताइन क्षेत्र में मौजूद बच्चों की लगभग आधी संख्या पिछले दो सप्ताह से बीमार थी।
 
उनके अनुसार, बुख़ार, दस्त, श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण, टीकाकरण की कम दर, असुरक्षित पानी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था मिलकर, पहले से ही कुपोषित बच्चों के लिए इलाज से ठीक हो सकने वाली बीमारियों को भी मौत की ओर धकेल रही हैं।
 

नज़रें नहीं फेरने की अपील

यूनीसेफ़ प्रवक्ता ने दुनिया से सूडान के बच्चों की ओर से नज़रें फेरना बन्द करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उत्तर दारफ़ूर के उम बारू क्षेत्र में बच्चों की आधी से अधिक आबादी हमारी आंखों के सामने ही कुपोषण से बेहद कमज़ोर होते जा रहे हैं। यह कोई आंकड़ा नहीं है, ये ऐसे बच्चे हैं जिनके नाम हैं और जिनका भविष्य छीना जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि सूडानी सशस्त्र बल (SAF) और त्वरित सहयोग बल (RSF) के बीच युद्ध शुरू हुए क़रीब तीन साल हो चुके हैं, जिसमें अब तक 1 करोड़ 36 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित होने को विवश हुए हैं, जिनमें 91 लाख लोग देश के भीतर ही बेघर हुए हैं।
 

तत्काल मदद की ज़रूरत

सूडान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉ. शिब्ले सहबानी ने बताया कि विस्थापित लोगों को तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है, लेकिन देश की स्वास्थ्य प्रणाली, लगातार हमलों, उपकरणों और आपूर्तियों के नुक़सान, स्वास्थ्यकर्मियों की कमी और संचालन के लिए धन की भारी किल्लत के कारण बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
 
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक स्वास्थ्य सेवाओं पर 205 हमलों की पुष्टि की जा चुकी है, जिनमें 1,924 लोगों की मौत हुई है और 529 लोग घायल हुए हैं। डॉक्टर सहबानी ने चेतावनी दी कि ऐसे हमले, समुदायों को वर्षों तक इलाज से वंचित कर देते हैं, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों में भय उत्पन्न करते हैं और जीवनरक्षक उपचार तक पहुंच के रास्ते में गम्भीर बाधाएं खड़ी करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि सूडान इस समय हैज़ा, मलेरिया, डेंगू और ख़सरा समेत अनेक संक्रामक रोगों के प्रकोप का सामना कर रहा है।
 

शान्ति की मांग

डॉ. शिब्ले सहबानी के अनुसार, WHO और उसके साझेदार संगठन इन प्रकोपों से निपटने के प्रयासों में जुटे हुए हैं, लेकिन अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के अनुरूप स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सुरक्षित पहुंच और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना बेहद ज़रूरी है।
 
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इलाज के लिए आने वाले मरीज़ों और उपचार उपलब्ध कराने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए। उन्होंने अपील करते हुए कहा, सबसे बढ़कर हम शान्ति की मांग करते हैं, सूडान को बहुत देर से शान्ति की प्रतीक्षा है।
इससे पहले यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने सोमवार को जिनीवा में मानवाधिकार परिषद को जानकारी देते हुए कहा था कि अल-फ़शर में पिछले वर्ष अक्टूबर में हुई मानवाधिकार त्रासदी को रोका जा सकता था।
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