एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में जम्मू जिले के इंटरनेशनल बार्डर से सटे रणवीर सिंह पुरा अर्थात आरएस पुरा इलाके में स्थित बाल सुधार केंद्र से दो पाकिस्तानियों समेत तीन नाबालिग अपराधी फरार हो गए हैं। इस घटना से हड़कंप मच गया है। दरअसल फरार हुए नाबालिगों में दो पाकिस्तानी नागरिक बताए जा रहे हैं, जबकि एक जम्मू-कश्मीर का निवासी है। चिंता की बात यह है कि फरार होने वाले नाबालिगों ने केंद्र में फायरिंग भी की जिसमें दो पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं। फिलहाल सारे मामले पर अधिकारियों द्वारा चुप्पी साधी गई है।
भागने वालों की पहचान अहसान अनवर, पुत्र मोहम्मद अनवर, निवासी ननकाना साहिब, पंजाब, पाकिस्तान के रूप में की गई है; मोहम्मद सनाउल्लाह, पुत्र मोहम्मद जफर, निवासी बस्ती जावेवाला, तहसील दीनपुर, जिला मुजफ्फराबाद, पंजाब, पाकिस्तान; और आरएस पुरा के डबलेहर निवासी अर्जुन सिंह का बेटा करणजीत सिंह उर्फ गुग्गा।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक फरार होने वाले नाबालिगों में दो पाकिस्तानी नागरिक हैं। वहीं एक जम्मू कश्मीर का ही रहने वाला है। घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। फरार नाबालिगों की तलाश के लिए नाकेबंदी की गई है और आसपास के क्षेत्रों में सघन चेकिंग चल रही है।
चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर रखी जा रही है। वहीं लोगों से फरार नाबालिगों के बारे में पूछताछ भी की जा रही है।
बताया जाता है कि बाल सुधार केंद्र से भागते समय इन तीनों नाबालिगों ने कथित तौर पर फायरिंग की, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने दोनों घायलों को जम्मू के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।
हालांकि पुलिस इस बात की जांच में जुटी है कि बाल सुधार केंद्र के भीतर इन नाबालिगों तक हथियार कैसे पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक को लेकर भी जांच की जा रही है। इस घटना से चारों तरफ-अफरा तफरी मच गई. वहीं सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नाबालिगों तक हथियार पहुंचना सुरक्षा में चूक को साफतौर पर उजागर करता है।
वैसे अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही फरार नाबालिगों को पकड़ लिया जाएगा और मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर की एक अन्य बड़ी खबर
आतंकियों के पोस्ट से लोगों में दहशत
प्रदेश में पुलिस द्वारा आतंकियों की तलाश में लगाए जा रहे पोस्टर लोगों में दहशत पैदा करने लगे हैं। पहले ही कठुआ के उपायुक्त द्वारा इंटरनेशनल बार्डर पर पाक गोलाबारी की आशंका जताते हुए 5 किमी की सीमा पटटी में रात को लोगों के आने जाने पर लगाए गए प्रतिबंध से भी दहशत का माहौल है।
अब जबकि खुफिया सूत्रों ने अंदेशा जताया है कि पाकिस्तान से जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकियों का एक फिदायीन दस्ता भारतीय सीमा में घुसा है। आतंकियों का ये समूह सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की फिराक में हैं। ऐसे में सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे कठुआ जिले में और आसपास के क्षेत्रों में सेना व पुलिस से लेकर अन्य सुरक्षाबलों के ठिकानों व प्रमुख इमारतों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस संबंध में आतंकियों की फोटो वाले पोस्टर कठुआ जिले में चिपकाए गए हैं।
एक दिन पहले ही जिला मजिस्ट्रेट कठुआ ने हीरानगर सेक्टर में पहाड़पुर से करोल कृष्णा बार्डर पोस्ट के बीच 5 किमी के दायरे में रात की आवाजाही पर दो माह के लिए प्रतिबंध लगाया है। रात नौ बजे से सुबह छह बजे के बीच सीमा क्षेत्र की सड़कों पर बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रतिबंधित है।
सूत्रों ने बताया कि आतंकी षड्यंत्र के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कठुआ शहर में जगह-जगह दीवारों और खंभों पर संदिग्ध आतंकियों के पोस्टर लगाए गए हैं। इस बीच, लोहाई मल्हार के मलाड़ इलाके में तीन संदिग्धों की मूवमेंट भी देखी गई है।
जबकि पुलिस ने आतंकवाद रोधी अभियान तेज करते हुए डोडा जिले में भी सक्रिय आतंकवादियों के बारे में सूचना देने के संबंध में कई अहम स्थानों पर पोस्टर चस्पा किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्लाह का नाम भी शामिल है।
दरअसल हालिया मुठभेड़ और क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी से जुड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू संभाग के ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में यह कदम उठाया गया है। पोस्टर डोडा के प्रवेश बिंदु पर गणपत पुल, नागरी, डेसा और ठाठरी समेत प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जनसहभागिता बढ़ाने के लिए संवेदनशील इलाकों में और भी नोटिस लगाए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि यह पोस्टर अभियान चेनाब घाटी क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। डोडा और पड़ोसी किश्तवाड़ जिलों में हाल के वर्षों में कई मुठभेड़ हुई हैं, क्योंकि आतंकियों ने जम्मू क्षेत्र के उन हिस्सों में फिर से गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश की है, जहां पहले आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था। Edited by : Sudhir Sharma