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Written By UN
Last Modified: गुरुवार, 29 जनवरी 2026 (17:41 IST)

सुरक्षा परिषद : मध्य-पूर्व में अस्थिरता पर बैठक, किन देशों ने क्या कहा?

United Nations Security Council meeting
United Nations Security Council meeting : मध्य-पूर्व में अस्थिरता के मुद्दे पर बुधवार को सुरक्षा परिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई है। इस बैठक का मुख्य ध्यान ग़ाज़ा शान्ति योजना, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के शान्ति बोर्ड की भूमिका, ग़ाज़ा में जारी भीषण मानवीय संकट और पश्चिमी तट व पूर्वी येरूशलम में अशान्ति के मुद्दों पर रहा।
 

फिलिस्तीन : हत्याएं बन्द हों, मुक्त मानवीय पहुंच हो 

रियाद मंसूर, संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन राज्य के स्थायी पर्यवेक्षक, ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित किया। संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के स्थाई पर्यवेक्षक रियाद मंसूर ने अक्टूबर (2025) में हुए युद्धविराम समझौते का स्वागत किया और इसके कार्यान्वयन में अमेरिकी सरकार की मध्यस्थता की सराहना की।
 
उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन ने युद्धविराम का ईमानदारी से समर्थन किया। इसके बावजूद अनेक उल्लंघन हुए और कम से कम 500 फिलिस्तीनियों की मौत हुई है। रियाद मंसूर ने सभी इसराइली बन्धकों और कै़दियों की रिहाई का भी स्वागत किया। 
उन्होंने साथ ही सवाल भी उठाया कि उन अनगिनत फिलिस्तीनी परिवारों का क्या, जिनके प्रियजन मारे गए हैं, हज़ारों शव अब भी मलबे में दबे हुए हैं और उन्हें सम्मानजनक अन्तिम विदाई नहीं मिली है। रियाद मंसूर ने कहा कि आम पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी की पीड़ा तुरन्त समाप्त होनी चाहिए और सभी के लिए स्वास्थ्य, पुनर्वास और न्याय सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
 

इसराइल : हमास को निरस्त्र किया जाए

इसराइल के राजदूत डेनी डैनन ने कहा कि 2014 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि ग़ाज़ा में कोई भी इसराइली बन्धक नहीं बचा है। यह उपलब्धि इसराइली रक्षाबलों (IDF) की कार्रवाई का परिणाम है।
 
डैनन ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शान्ति ढांचे का स्वागत किया और कहा कि इसराइल का दूसरा लक्ष्य हमास का निरस्त्रीकरण है। शान्ति योजना के चरण-दो के तहत ग़ाज़ा के लिए ज़िम्मेदार शासन ढांचे की स्थापना की जाएगी।
इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में मध्य पूर्व की स्थिति और फिलिस्तीनी शरणार्थियों पर भाषण दिया। राजदूत डैनन ने स्पष्ट किया कि अब निर्णय हमास पर है। हथियार डालने से प्रगति सम्भव है, जबकि इनकार की पूरी ज़िम्मेदारी हमास पर होगी।
 
इसराइली राजदूत ने हमास के घोषणा पत्र को दिखाते हुए कहा कि यह समूह शान्ति के लिए तैयार नहीं है और सामूहिक हत्या का इरादा रखता है। उन्होंने कहा कि इसराइल ने सभी प्रमुख सीमा चौकियां खोल दी हैं और हाल ही में रफ़ाह चौक़ी भी खोली गई, जिससे राहत कार्य जारी हैं।
 

अमेरिका : ग़ाज़ा को वहां के लोगों के लिए पुनर्निर्मित किया जाना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत माइकल जी. वाल्ट्ज ने फिलिस्तीनी मुद्दे सहित मध्य पूर्व की स्थिति पर भाषण दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने कहा कि 2014 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि ग़ाज़ा में हमास और उसके आतंकी सहयोगियों के पास कोई बन्धक नहीं हैं, यह स्थिति असाधारण है।
 
16 जनवरी को ग़ाज़ा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति का गठन हुआ, जिससे पहली बार वर्ष 2007 के बाद हमास का समर्थन नहीं करने वाले ग़ाज़ा के लोग शान्ति और सुरक्षित भविष्य की दिशा में क़दम बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमास और अन्य सशस्त्र समूहों को हथियार डालने होंगे और ग़ाज़ा को ग़ाज़ा के लोगों के लिए पुनर्निर्मित किया जाना चाहिए।
 

चीन : मध्य-पूर्व एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है

चीन के राजदूत फू कांग ने कहा कि मध्य-पूर्व एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने सभी पक्षों से तत्काल सभी हिंसक युद्धों को रोकने का आग्रह किया और इसराइल में सभी बन्धकों की वापसी का स्वागत किया। उन्होंने पश्चिमी तट में सभी पक्षों से युद्धविराम समझौते का पूर्ण पालन करने और इसराइल से यहूदी बस्तियों के विस्तार सम्बन्धी गतिविधियां रोकने तथा यहूदी बाशिन्दों की हिंसा को नियंत्रित करने का अनुरोध किया।
 
चीनी राजदूत ने कहा कि मानवीय सहायता का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित किया जाना चाहिए और इसराइल को अपने अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के दायित्वों को पूरा करने तथा सभी प्रतिबन्ध हटाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसराइल को UNRWA के विशेषाधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।
 

फ़्रांस : अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का पालन हो

फ़्रांस के राजदूत जेरोम बोन्नाफां ने कहा कि ग़ाज़ा में युद्धविराम के बावजूद मानवीय आपात स्थिति बनी हुई है और लोगों तक पर्याप्त मदद नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने इसराइल से मानवीय सहायता पहुंचाने में बाधाओं को हटाने का आग्रह किया, ताकि संयुक्त राष्ट्र और राहत संगठन अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। 
राजदूत ने शान्ति बोर्ड की स्थापना पर कहा कि इसके स्थापक दस्तावेज़ ने महत्वपूर्ण राजनीतिक और क़ानूनी सवाल उठाए हैं, ख़ासकर इसके दायरे और संचालन को लेकर। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसके कार्य, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2803 के तहत ही अनुमोदित होने चाहिए। साथ ही सुरक्षा परिषद को 2803 प्रस्ताव के क्रियान्वयन की प्रगति की नियमित जानकारी दी जानी चाहिए।
 

रूस : जबरन पुनर्वास अस्वीकार्य

सुरक्षा परिषद में ग़ाज़ा संकट पर अल्जीरिया द्वारा प्रस्तुत किए गए मसौदा प्रस्ताव पर रूस के राजदूत वैसिली ए. नेबेंज़िया ने हाल की परिस्थितियों को सावधानीपूर्ण आशावादी बताया। यह प्रतीकात्मक क़दम दोनों देशों और उनके लोगों के बीच सम्बन्धों की बहाली के लिए ठोस आधार बना सकता है।
 
नेबेंज़िया ने शान्ति योजना की सफलता के लिए फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाना आवश्यक बताया और ग़ाज़ा के लोगों के जबरन विस्थापन को अस्वीकार्य क़रार दिया। उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बलों की तैनाती का विवरण अमेरिका से अपेक्षित है और मिशन की सफलता पक्षों की सहमति और मिशन की क्षमता पर निर्भर करेगी।
 
रूसी राजदूत ने कहा कि इसराइल को अपनी मानवीय ज़िम्मेदारियों में और अधिक विलम्ब करने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने UNRWA के 309 कर्मचारियों की मृत्यु पर चिन्ता व्यक्त करते हुए, निष्पक्ष जांच और दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने की आवश्यकता पर बल दिया और इस मामले को अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के समक्ष भेजने की भी बात कही।
 

ब्रिटेन : UNRWA मानवीय कार्रवाई की रीढ़ है 

ब्रिटेन के राजदूत और उप स्थाई प्रतिनिधि जेम्स करिउकी ने ग़ाज़ा शान्ति योजना के चरण-2 को तुरन्त लागू किए जाने का आग्रह किया, जिसमें इसराइली बलों की वापसी, हमास का निरस्त्रीकरण और अन्तरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती शामिल है।
 
उन्होंने ग़ाज़ा में अब भी विनाशकारी मानवीय स्थिति को लेकर तत्काल क़दम उठाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। राजदूत करिउकी ने UNRWA पर हमलों और राहत संगठनों पर पाबन्दियों की निन्दा करते हुए कहा, ये मानवीय सहायता कार्रवाई की रीढ़ हैं, इनके बिना फिलिस्तीनियों को और अधिक कष्ट झेलना पड़ेगा।
 

अरब समूह का ग़ाज़ा युद्ध विराम पर पूर्ण अमल का आग्रह

जॉर्डन के राजदूत वलीद ओबीदात ने अरब समूह की तरफ़ से बोलते हुए, इसराइल द्वारा अक्टूबर (2025) में हुए युद्धविराम का पूरी तरह पालन किए जाने की महत्ता को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, अरब समूह इस समझौते के दूसरे चरण पर अमल शुरू किए जाने और राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक योजना के पूर्ण क्रियान्वयन व सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 पर पूरी तरह अमल किए जाने की तरफ़ बढ़ने की महत्ता को रेखांकित करता है।
 
जॉर्डन के राजदूत ने कहा कि शान्ति बोर्ड और ग़ाज़ा के प्रशासन के लिए फिलिस्तीनी राष्ट्रीय समिति की स्थापना से युद्धविराम को मज़बूत करने में मदद मिलनी चाहिए और यह एक ऐसे वास्तविक राजनातिक क्षितिज को आगे बढ़ाए जिसमें से एक सम्प्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्वतंत्रता का रास्ता निकले।
 

सोमालिया : फिलिस्तीनियों को हटाने की इसराइली योजना की निन्दा

जनवरी के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष सोमालिया के राजदूत अबूकर दाहिर ओसमान ने अपने देश की तरफ़ से बोलते हुए, सोमालिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में एक अलगाववादी गुट को स्वतंत्र इकाई के रूप में मान्यता दिए जाने और फिलिस्तीनी लोगों को जबरन विस्थापित करके उनके देश के एक क्षेत्र में बसाने सम्बन्धी हाल की कार्रवाइयों की निन्दा की।
उन्होंने कहा, इस तरह की कार्रवाइयां, सोमालिया की सम्प्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन हैं और हॉर्न ऑफ़ अफ़्रीका को भी मध्य पूर्व संकट की अस्थिरता फैलाने वाली लहरों की चपेट में लेने का जोखिम उत्पन्न करती हैं। सोमालिया के राजदूत ने कहा कि अफ़्रीका में नई राजनीतिक वास्तविकताएं थोपने के प्रयास एक ख़तरनाक चलन शुरू करते हैं और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून व क्षेत्रीय स्थिरता, दोनों के नियमों को कमज़ोर बनाते हैं।
 
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, आबादियों को स्थानान्तरित करने और सीमाएं फिर से खींचने की बाहर से थोपी गई कोई भी योजना से समस्याओं के बारे में शिकायतें और अधिक गहरी होंगी और टकराव का दायरा बढ़ने का जोखिम बढ़ेगा।
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