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Written By UN
Last Modified: शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 (13:56 IST)

UN महासचिव एंतोनियो ने पेश की अंतिम वर्ष की प्राथमिकताएं, बोले- विश्वभर में तनावों के खतरनाक दुष्परिणाम सामने आ रहे, अराजकता के बजाय शांति को चुनें

Antonio Guterres_UN Secretary General
विश्वभर में उभरते तनावों और लापरवाही भरे क़दमों के ख़तरनाक दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं और इस पर लगाम कसने के लिए यह ज़रूरी है कि शान्ति, न्याय व सतत विकास की दिशा में नए सिरे से प्रयास किए जाएं। यूएन के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने अपने कार्यकाल के अन्तिम वर्ष, 2026 के लिए अपनी प्राथमिकताएं पेश करते हुए यह पुकार लगाई है।
 
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को न्यूयॉर्क में सम्बोधित करते हुए कहा कि 2026 पहले से ही भारी उथलपुथल और निरन्तर चौकाने वाली घटनाओं का साल साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि गहन बदलाव के दौर में उन स्थापित सिद्धान्तों की ओर लौटना होगा, जो हमें बताते हैं कि शक्ति किस तरह से कार्य करती है।
यूएन प्रमुख ने गति के लिए न्यूटन के तीसरे नियम का उल्लेख किया, जिसके अनुसार प्रत्येक क्रिया की, हमेशा समान व विपरीत प्रतिक्रिया होती है। हम जब यह वर्ष शुरू कर रहे हैं, हम उन कार्रवाइयों को चुनने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनसे ठोस व सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न हो। विपत्तियों भरे इस समय में शान्ति, न्याय, दायित्व व प्रगति की प्रतिक्रिया।
 

परिणामों की श्रृंखला

उन्होंने कहा कि दंडहीनता की भावना आज हिंसक टकरावों को हवा दे रही है, अविश्वास बढ़ रहा है और इस वजह से स्थिति बिगाड़ने वाले शक्तिशाली पक्षों को हर दिशा से आने की अनुमति मिल रही है। उनके अनुसार, मानवीय सहायता में कटौती से स्वयं ही एक नतीजों का सिलसिला शुरू हुआ है, जो नाउम्मीदी, विस्थापन और मौत की वजह बन रहा है और असमानताएं गहरा रही हैं।
 
यूएन प्रमुख ने जलवायु परिवर्तन को न्यूटन के सिद्धान्तों का सबसे भयावह उदाहरण बताया, जो कि पृथ्वी को गर्माने वाले क़दमों के परिणामस्वरूप, तूफ़ानों, वनों में आग, सूखे और समुद्री जल के बढ़ते स्तर के रूप में नज़र आ रहा है।
 

शक्ति हस्तान्तरण की प्रक्रिया

उन्होंने सचेत किया कि दुनिया फ़िलहाल सम्भवत: हमारे दौर के सबसे बड़े शक्ति हस्तान्तरण की प्रक्रिया से गुज़र रही है, और यह सरकारों के हाथों से निकलकर निजी टेक्‍नोलॉजी कम्पनियों के पास जा रही है। व्यवहार, चुनावों, बाज़ारों और यहां तक की हिंसक टकरावों को प्रभावित करने वाली टेक्‍नोलॉजी, जब बिना किसी सुरक्षा के काम करती है, तो उसकी प्रतिक्रिया में नवाचार नहीं होता, अस्थिरता पैदा होती है। 
महासचिव गुटेरेश ने आगाह किया कि ये चुनौतियां इसलिए सामने आ रही हैं, चूंकि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए मौजूदा व्यवस्थाएं 80 वर्ष पहले के आर्थिक व शक्ति तंत्रों को दर्शाती हैं और इसे बदले जाने की ज़रूरत है। हमारी ढांचागत व्यवस्था व संस्थाओं में इस जटिलता को परिलक्षित करना होगा, और इस नए समय के अवसरों व वास्तविकताओं को भी।
 
उन्होंने कहा कि वैश्विक समस्याओं को ऐसे नहीं सुलझाया जा सकता है कि हर निर्णय केवल एक शक्ति के द्वारा ही किया जाए। और न ही उन्हें दो ऐसे शक्ति सम्पन्न पक्षों के द्वारा सुलझाया जा सकता है, जो कि अपने प्रभुत्व के प्रतिद्वंद्वी हिस्सों को तैयार कर रहे हों।
 

साझा मूल्य

यूएन प्रमुख के अनुसार, बहुध्रुवीयता के ज़रिए साम्यावस्था, समृद्धि व शान्ति पैदा करने के लिए हमें मज़बूत बहुपक्षीय संस्थाओं की आवश्यकता है, जिनकी वैधता की बुनियाद में साझा दायित्व व साझा मूल्य हों। महासचिव ने अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधारों पर बल देते हुए कहा कि मौजूदा ढांचे भले ही पुराने हो चले हों, लेकिन मूल्य अब भी वही हैं।
यूएन चार्टर तैयार करने वाले लोगों ने यह समझ लिया था कि हमारे संस्थापक दस्तावेज़ों में निहित मूल्य, कोई हवाई अमूर्त अवधारणाएं या आदर्शवादी उम्मीदें नहीं हैं, बल्कि स्थाई शान्ति व चिरस्थाई न्याय के लिए अनिवार्य शर्त हैं। सभी बाधाओं के बावजूद संयुक्त राष्ट्र हमारे साझा मूल्यों को जीवन देने के लिए प्रयासरत है और कभी हिम्मत नहीं हारेगा।
 

शान्ति, सुधार व विकास

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र, न्यायसंगत व सतत शान्ति की कोशिशों में निहित है, जिसकी बुनियाद अन्तरराष्ट्रीय क़ानून पर टिकी हो। ऐसी शान्ति जिसमें मूलभूत वजहों से निपटा जाए और जो केवल किसी समझौते पर हस्ताक्षर तक सीमित नहीं हो। 
 
महासचिव ने बताया कि सुरक्षा परिषद में सुधार और उसे मज़बूत बनाए जाने की भी पैरवी की जा रही है। यूएन चार्टर के अन्तर्गत यह संगठन का एकमात्र ऐसा अंग है, जो कि अन्य देशों की ओर से शान्ति व सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर क़दम उठा सकता है।
 
उन्होंने ध्यान दिलाया कि बिना विकास के, शान्ति को स्थाई नहीं बनाया जा सकता है और इसलिए टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को साकार किया जाना होगा और वैश्विक वित्तीय तंत्र में भी बदलाव करने होंगे। 

जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमता

महासचिव ने दोहराया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए यह ज़रूरी है कि इस दशक में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में गहरी कटौतियां की जाएं और जीवाश्म ईंधन के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा साधनों पर न्यायोचित ढंग से निर्भरता बढ़ाई जाए।
 
उन्होंने ऐसे देशों के लिए अधिक समर्थन की मांग की है, जो पहले से ही जलवायु आपदा की चपेट में हैं। इसके लिए समय पूर्व चेतावनी प्रणालियों का विस्तार किया जाना होगा और खनिज सम्पदा में धनी देशों के लिए अवसर बनाने होंगे, ताकि वे वैश्विक वैल्यू चेन का हिस्सा बन सकें।
 
संयुक्त राष्ट्र इसके साथ-साथ प्रौद्योगिकी संचालन व्यवस्था के लिए एक फ़्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें वैश्विक सम्वाद, क्षमता निर्माण के लिए समर्थन, और कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) पर नए अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल का सहारा लिया गया है।
यूएन प्रमुख ने विकासशील देशों के लिए एआई क्षमता विकास पर वैश्विक कोष की भी अपील की है, जिसके लिए 3 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।
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